भूमि पूजन के साथ हुआ कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर की भागवत कथा की तैयारियों का शंखनाद
शिवपुरी। सामान्य रूप से तो नववर्ष महोत्सव एक जनवरी को पूरे विश्व में मनाया जाता है, परंतु भारतीय सनातन परंपरा में नववर्ष की शुरूआत गुड़ी पड़वा के साथ मानी गई है। भारतीय सनातन परंपरा में नव वर्ष गुड़ी पड़वा से क्यों माना गया है। सनातन में आखिर ऐसा क्या है, जो अन्य धर्मों में नहीं। आखिर सनातन को सभी धर्मों का जनक क्यों कहा जाता है आदि-इत्यादि से देश सहित विदेश के लोगों को अवगत कराने के लिए शिवपुरी में 19 मार्च से हवाई पट्टी के पीछे नर्सरी ग्राउंड पर श्री खेड़ापति सरकार के सानिध्य में गुड़ी पड़वा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। इस विशाल आयोजन के लिए 25 फरवरी को नर्सरी ग्राउंड पर भूमि पूजन और यज्ञ संपन्न हुआ। आयोजन समिति का कहना है कि इस आयोजन के माध्यम से सनातन का परचम सात समुंदर पार फहराने के लिए 40 देशों से विदेशी मेहमानों का आना तय हो गया है। खेड़ापति दरबार के महंत मोहित दास महाराज एवं नीलमणि महाराज का कहना है कि इस आयोजन के दौरान विदेशों से आए लोग सनातन संस्कृति को करीब से पढेंगे, सीखेंगे औ समझेंगे। इस दौरान न सिर्फ विश्व विख्यात कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के मुखारबिंद से भागवत सुनाई जाएगी बल्कि शतचंडी यद सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे।
ये भी होंगे आयोजन
-साक्षात गंगा के तट का अनुभव कराने के लिए ऋषिकेश से 11 प्रकांड विद्वान ब्राह्मण आ रहे हैं, जो प्रतिदिन शाम 7:30 बजे ऋषिकेश की तर्ज पर भव्य महाआरती करेंगे।
-नवरात्रि के पावन पर्व पर कथा स्थल पर 9 देवियों के अस्थाई शक्तिपीठों की स्थापना की जाएगी।
-भक्ति के साथ सामाजिक सरोकार निभाते हुए 11 निर्धन कन्याओं का भव्य विवाह कराया जाएगा, जिन्हें पूर्ण गृहस्थी का सामान उपहार स्वरूप दिया जाएगा।
100 सदस्यों वाली 25 टीम संभालेंगी व्यवस्था
इतने विशाल जनसमूह को संभालने के लिए 100 सदस्यों वाली 25 विशेष समितियां गठित की गई हैं। इन सभी समितियों के अपने-अपने काम निर्धारित हैं। 2500 समर्पित स्वयंसेवकों वाली यह समितियां दिन-रात तैनात रहकर व्यवस्थाओं को संभालेंगे। श्रद्धालुओं के लिए भंडारा, एक दिवसीय विशेष यज्ञ और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यज्ञ में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को आधार कार्ड के साथ अपना पंजीयन कराना होगा।







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