शिवपुरी: जिले के इंदार थाना क्षेत्र के झंडी गांव के 19 आदिवासी मजदूरों को इंदौर में बंधक बनाकर रखने का मामला सामने आया है। इन मजदूरों को 700 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी का लालच देकर इंदौर ले जाया गया था। वहां होटलों में 20 दिन तक काम कराने के बाद जब उन्होंने भुगतान मांगा, तो ठेकेदारों ने उन्हें एक होटल में बंधक बना लिया। पांच दिन तक कैद रहने के बाद मजदूर किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग निकले और बिना पैसे लिए गांव लौटे। पीड़ित मजदूर आज (शनिवार) इंदार थाने पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराएंगे।
झंडी गांव निवासी धनीराम आदिवासी ने बताया कि अशोकनगर जिले के बीपी यादव और रतिराम आदिवासी ने खुद को लेबर ठेकेदार बताया था। उन्होंने इंदौर में लॉज और होटलों में कैटरिंग के काम के लिए मजदूरों को तैयार किया। ठेकेदारों ने प्रति दिन 700 रुपये मजदूरी और रहने-खाने की व्यवस्था का आश्वासन दिया था। इन ठेकेदारों के भरोसे पर 14 दिसंबर को गांव से 19 मजदूर इंदौर के लिए रवाना हुए और 15 दिसंबर से उन्हें काम पर लगा दिया गया।
धनीराम के अनुसार, इंदौर में मजदूरों से होटल और लॉज में होने वाले समारोहों के दौरान सफाई और जूठे बर्तन धोने का काम कराया गया। 20 दिन काम करने के बाद जब मजदूरों ने मजदूरी के कुछ पैसे मांगे, तो ठेकेदारों ने टालमटोल शुरू कर दी। इस पर मजदूरों ने भुगतान होने तक काम न करने की बात कही। इसके बाद ठेकेदारों ने सभी 19 मजदूरों को होटल में ही बंधक बना लिया।
करीब पांच दिनों तक होटल में बंधक रहने के बाद, मजदूर मौका पाकर किसी तरह वहां से बाहर निकलने में सफल रहे। पैसे न होने के कारण वे बिना टिकट ट्रेन में बैठकर बदरवास स्टेशन पहुंचे और वहां से अपने गांव लौटे।
धनीराम आदिवासी ने बताया कि सभी पीड़ित मजदूर शनिवार को इंदार थाना पहुंचकर पुलिस को आपबीती सुनाएंगे और शिकायत दर्ज कराएंगे। वे आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और अपनी बकाया मजदूरी दिलाए जाने की मांग करेंगे।








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