शिवपुरी: दिनारा क्षेत्र इन दिनों एक महान् तपस्वी और गौ सेवक कल्लू महाराज की तपस्या, साधना और सेवा भाव के कारण विशेष चर्चा में है। कठोर तप, संयमित जीवन और निस्वार्थ गौ सेवा को अपना जीवन ध्येय बना चुके कल्लू महाराज को क्षेत्रवासी आज एक साधारण व्यक्ति नहीं, बल्कि सनातन परंपरा के जीवंत प्रतीक के रूप में देख रहे हैं।कल्लू महाराज का जीवन वैभव, सुख-सुविधाओं और दिखावे से कोसों दूर है। वे अत्यंत सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए दिन-रात ईश्वर साधना और गौ माता की सेवा में लीन रहते हैं। अल्प वस्त्रों में, खुले वातावरण में बैठकर ध्यान और प्रार्थना करना उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा है। उनके तपस्वी स्वरूप को देखकर हर श्रद्धालु के मन में स्वतः श्रद्धा और आस्था जाग उठती है।स्थानीय लोगों के अनुसार कल्लू महाराज ने वर्षों पहले सांसारिक मोह-माया का त्याग कर गौ सेवा और साधना का मार्ग अपनाया। वे घायल, बीमार और बेसहारा गौवंश की सेवा स्वयं करते हैं। चारा, पानी, उपचार और संरक्षण की व्यवस्था में वे बिना किसी सरकारी सहायता या प्रचार के जुटे रहते हैं। कई बार अपनी जरूरतों को पीछे रखकर गौ माता की सेवा को प्राथमिकता देना उनके त्याग और समर्पण को दर्शाता है।दिनारा सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु महाराज के दर्शन और आशीर्वाद के लिए पहुंचते हैं। लोगों का विश्वास है कि कल्लू महाराज की तपस्या और आशीर्वचन से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और जीवन में नई दिशा मिलती है। विशेष अवसरों पर भजन, ध्यान और गौ पूजन का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें समाज के हर वर्ग के लोग भाग लेते हैं।कल्लू महाराज का संदेश अत्यंत सरल लेकिन प्रभावशाली है— “गौ सेवा ही सच्ची ईश्वर सेवा है।” वे युवाओं से नशे, हिंसा और दिखावे से दूर रहकर सेवा, संयम और संस्कारों से जुड़ने का आह्वान करते हैं। उनका मानना है कि जब समाज गौ माता की रक्षा करेगा, तभी संस्कृति और मानवता सुरक्षित रह पाएगी आज जब भौतिकता और स्वार्थ समाज पर हावी होते जा रहे हैं, ऐसे समय में महान् तपस्वी कल्लू महाराज जैसे संत समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य कर रहे हैं। उनकी तपस्या, सेवा और त्याग न केवल दिनारा क्षेत्र बल्कि पूरे अंचल के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
निस्संदेह, कल्लू महाराज का जीवन आने वाली पीढ़ियों को सनातन मूल्यों, गौ संरक्षण और मानव सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।








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