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पोहरी क्षेत्र की आंगनवाड़ियों में अनियमितताओं का अड्डा: वर्षों से नहीं हुई रंगाई-पुताई, स्वीकृत राशि का मिलकर किया गया बंटाधार / Shivpuri News

शिवपुरी: पोहरी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पोहरी क्षेत्र में संचालित आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए संचालित ये केंद्र आज खुद बदहाली के शिकार नजर आ रहे हैं। कई आंगनवाड़ी भवनों में वर्षों से न तो रंगाई-पुताई कराई गई है और न ही बुनियादी सुविधाओं पर कोई ध्यान दिया गया है। जर्जर भवन महिला एवं बाल विकास विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर कर रहे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार अनेक आंगनवाड़ी केंद्रों की दीवारें उखड़ चुकी हैं, छतों से प्लास्टर गिर रहा है और साफ-सफाई की स्थिति भी बदतर है। बच्चों के बैठने, खेलने और पढ़ाई के लिए सुरक्षित वातावरण तक उपलब्ध नहीं है, जिससे उनके स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार पोहरी क्षेत्र में वर्तमान में महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर के रूप में उर्मिला जैन पदस्थ हैं। नियमों के तहत सुपरवाइजर का मुख्य दायित्व अपने अधीनस्थ आंगनवाड़ी केंद्रों की नियमित निगरानी करना, कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के कार्यों की जांच करना, पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा कार्यक्रमों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना होता है।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सुपरवाइजर अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरत रही हैं, जिसके चलते आंगनवाड़ी केंद्र अव्यवस्थाओं का शिकार हो गए हैं।

वर्ष 2024-25 में पोहरी क्षेत्र के कटरा-2, सोनीपुरा, देद खुर्द एवं मचा खुर्द सहित 5 आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए भवन सुधार व अन्य कार्यों हेतु राशि स्वीकृत की गई थी।
आरोप है कि इस राशि का जमीनी स्तर पर कोई ठोस उपयोग नहीं हुआ। भवन सुधार, रंगाई-पुताई जैसे कार्य केवल कागजों में दिखाए गए, जबकि वास्तविकता में केंद्रों की हालत जस की तस बनी हुई है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि संबंधित आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सुपरवाइजर ने मिलकर शासकीय राशि का दुरुपयोग किया है। मिलीभगत के चलते न तो कार्यों की निगरानी हुई और न ही किसी स्तर पर जवाबदेही तय की गई।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षों से चली आ रही इस लापरवाही पर महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी कब संज्ञान लेंगे। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो आंगनवाड़ी केंद्रों से मिलने वाली जरूरी सेवाएं लगातार प्रभावित होती रहेंगी और इसका सीधा नुकसान मासूम बच्चों, गर्भवती महिलाओं व धात्री माताओं को उठाना पड़ेगा।

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