बीजिंग। चीनी अधिकारियों ने कहा कि सरकारी केंद्रों में रखे गए ज्यादातर अल्पसंख्यक मुस्लिमों को उसने छोड़ दिया है। चीन उइगर मुस्लिमों के मामले में मानवाधिकारों के उल्लंघन को लेकर वैश्विक आलोचना और दबाव का सामना कर रहा है। हालांकि चीन ने अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस जानकारी नहीं दी है।
उन्होंने इस बात की भी जानकारी नहीं दी कि कितनी संख्या में उइगर मुस्लिम रिहा किए गए हैं? पिछले साल ऐसी खबरें आई थीं कि चीन ने शिनजियांग प्रांत में दस लाख से ज्यादा उइगर मुस्लिमों को कथित तौर पर कट्टरवाद विरोधी गुप्त हिरासत केंद्रों में कैद कर रखा है। चीन इन केंद्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण शिविर बताता रहा है। शिनजियांग के वाइस चेयरमैन अल्केन तुनिज ने मंगलवार को कहा, ‘अभी सरकारी व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों में जितने लोग शिक्षा और प्रशिक्षण ले रहे थे, उनमें से 90 फीसद अपने परिवारों और समाज में लौट गए हैं। इनमें से ज्यादातर रोजगार पाने में सफल हुए हैं।’
प्रांतीय सरकार के चेयरमैन ने भी इसी तरह का बयान दिया है। इन बयानों से यह जाहिर होता है कि चीन हिरासत केंद्रों को लेकर वैश्विक स्तर पर अपनी छवि सुधारने में जुट गया है। हिरासत केंद्रों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को बंदी बनाए जाने को लेकर वह अमेरिका समेत कई देशों की आलोचना झेल चुका है। चीन के इस दावे का स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाना लगभग असंभव है क्योंकि शिनजियांग में कई तरह की सख्त बंदिशें लगाई गई हैं। कोई भी विदेशी इस क्षेत्र में आसानी से पहुंच नहीं सकता।
चीन के दावे पर जताया संदेह
वाशिंगटन में रहने वाले उइगर सामाजिक कार्यकर्ता ताहिर इमिन ने चीन के दावे पर संदेह जाहिर किया है। उन्होंने कहा, ‘विदेश में रहने वाले उइगरों का शिनजियांग में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं हो रहा है। ना तो फोन पर बातचीत हो पाती है और ना ही इंटरनेट से संपर्क हो पाता है। हमें इस बात का यकीन नहीं है कि वे रिहा किए गए हैं। अगर चीन की सरकार ईमानदार है तो लोगों को स्वतंत्र रूप से बातचीत करने दे और मीडिया के लोगों को स्वतंत्र जांच के लिए वहां जाने दे।’
शिनजियांग में कई तरह के प्रतिबंध अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा से सटे शिनजियांग में 1.1 करोड़ से ज्यादा उइगर मुस्लिम रहते हैं। इस क्षेत्र में कई तरह के कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। वहां लोगों के असामान्य दाढ़ी रखने और बुर्का पहनने पर प्रतिबंध है। क्षेत्र के सभी कार मालिकों को ट्रैकिंग डिवाइस जीपीएस लगाने का आदेश दिया गया है। क्षेत्र में निगरानी के लिए ड्रोन भी तैनात किए गए हैं।
चीनी संस्कृति की दी जाती है सीख शिनजियांग में बनाए गए हिरासत केंद्रों में से एक में काम करने वाली एक कजाख महिला ने हाल में यह बताया था कि इन केंद्रों में अल्पसंख्यक मुस्लिमों को रखा जाता है। उन्हें कम्युनिस्ट विचारधारा के साथ ही चीनी भाषा और संस्कृति के बारे में सीख दी जाती है।
22 देशों ने किया था आग्रह इस महीने ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस और जर्मनी समेत 22 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर चीन से हिरासत केंद्रों में बंदी बनाए गए उइगरों और अन्य मुस्लिमों को रिहा करने का आग्रह किया था।





Be First to Comment