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घर बैठने के 75 लाख रुपए मिले हैं, क्षति की राशि लोकायुक्त अधिकारियों से वसूलें : वैश्‍य,


ग्वालियर। लोकायुक्त पुलिस के अधिकारियों ने मेरे खिलाफ झूठा केस दर्ज किया और तथ्य छिपाकर अभियोजन की स्वीकृति ली, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने मुझे यह कहते हुए दोषमुक्त कर दिया कि कोई केस ही नहीं बनता है। लोकायुक्त पुलिस के अधिकारियों द्वारा झूठा केस दर्ज करने से शासन को मुझे 15 साल घर बैठने पर 75 लाख रुपए वेतन के रूप में देने पड़े हैं।शासन को हुई इस क्षति की राशि लोकायुक्त एसपी, निरीक्षक से वसूल की जाए। यह मांग लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) से सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री केदारी लाल वैश्य ने पीएचई व विधि विभाग के प्रमुख सचिव और लोकायुक्त भोपाल को अभ्यावेदन भेजकर की है। श्री वैश्य आय से अधिक संपत्ति के मामले में 15 साल नौकरी से बर्खास्त रहे थे। सुप्रीम कोर्ट से वर्ष 2015 में दोषमुक्त होकर बहाल हुए और 2016 में सेवानिवृत्त ।श्री वैश्य ने अपने अभ्यावेदन में अवगत कराया है कि उनके खिलाफ झूठा केस दर्ज किया गया था। लोकायुक्त पुलिस ने विभाग में जब अभियोजन स्वीकृति का आवेदन किया था तो स्वीकृति नहीं दी गई थी। विभाग ने बताया गया कि वैश्य की 7 लाख 75 हजार की आय हो रही है और 6 लाख 48 हजार का व्यय है। इनके ऊपर आय से अधिक संपत्ति का केस नहीं बनता है। पुनर्विचार के लिए लोकायुक्त पुलिस को केस लौटा दिया गया।इसके बाद तथ्यों को छिपाया गया। झूठे तथ्य पेश करके अभियोजन स्वीकृति ली गई। लोकायुक्त अधिकारियों द्वारा झूठा केस दर्ज करने पर शासन को 75 लाख की क्षति हुई है। शासन को घर बैठने का वेतन देना पड़ा है। सेवा बहाल होने के बाद मैं विभाग में एक अच्छा अधिकारी भी रहा हूं। मेरे काम की सराहना भी की गई। 2016 में मेरे काम से खुश होकर सतना कलेक्टर ने सेवा बढ़ाने का भी प्रस्ताव भेजा था।
वहीं के विधायक ने जल संकट के दौरान अच्छा काम करने पर सम्मान भी किया, लेकिन लोकायुक्त अधिकारियों की वजह से मैं जनता की सेवा करने से वंचित रह गया और शासन को भी क्षति हुई है। झूठा केस दर्ज करने वाले तत्कालीन लोकायुक्त एसपी, निरीक्षकों से मुझे दिए गए वेतन की राशि वसूली जाए। श्री वैश्य ने नईदुनिया को बताया कि मैंने 30 दिन का नोटिस दिया है। इसके बाद लोकायुक्त अधिकारियों से वसूली के लिए कोर्ट में केस दायर करूंगा।
नल कनेक्शन काटने पर लोकायुक्त ने मारा छापा
केदारी लाल वैश्य की 15 जुलाई 1978 को पीएचई में उपयंत्री के पद पर भर्ती हुई थी। पदोन्नात होने के बाद शिवपुरी डिवीजन में सहायक यंत्री पर पदस्थ किया गया। शासन से आदेश मिलने पर उन्होंने शिवपुरी शहर में अवैध नल कनेक्शन के खिलाफ अभियान चलाया था।
लोकायुक्त के तत्कालीन निरीक्षक रामलखन सिंह भदौरिया व अनिल कुशवाह का विवेकानंद कॉलोनी स्थित घर का नल कनेक्शन अवैध होने पर काट दिया था।
 कनेक्शन काटने के बाद आय से अधिक संपत्ति के मामले में श्री वैश्य के घर 8 फरवरी 1994 को लोकायुक्त पुलिस ने छापा मारा और उन्हें तीन दिन हिरासत में भी रखा।
-तथ्यों को छिपाकर अभियोजन की स्वीकृति ली गई। 26 नवंबर 1996 को चालान पेश कर दिया। श्री वैश्य को तीन साल की सजा हुई और वह नौकरी से 2000 में बर्खास्त हो गए। हाईकोर्ट ने भी सजा को कन्फर्म कर दिया था।
-हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने वैश्य की एसएलपी पर फैसला सुनाया। कोर्ट ने आदेश दिया कि वैश्य के खिलाफ कोई केस ही नहीं बनता है। उन्हें दोषमुक्त कर दिया।
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