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72 साल बाद श्रद्धालुओं के लिए खुला गुरुद्वारा, अधिकारियों ने कहा- यहां भारतीय भी प्रार्थना कर सकेंगे ! International News

गुरुद्वारा चोवा साहिब पंजाब प्रांत के झेलम जिले में स्थित है। -फाइल

  • गुरुद्वारे चोवा साहिब का निर्माण 1834 में महाराजा रणजीत सिंह ने कराया था
  • 1947 में विभाजन के वक्त सिख समुदाय के पलायन करने के बाद से यह गुरुद्वारा बंद था
  • पिछले दिनों पाकिस्तान ने शवला तेज सिंह मंदिर को भी 72 साल के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोला था

लाहौर. पाकिस्तान ने बंटवारे के 72 साल बाद पंजाब प्रांत के झेलम जिले में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा चोवा साहिब को शुक्रवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया। इसका निर्माण 1834 में महाराजा रणजीत सिंह ने कराया था। 1947 में भारत-पाक के विभाजन के दौरान यहां रहने वाले सिख समुदाय के लोग पलायन कर गए। इसके बाद सरकार की अनदेखी के चलते गुरुद्वारा पूरी तरह से बंद था।
पाकिस्तान सरकार गुरुद्वारा चोवा साहिब को खोलने का फैसला नवंबर में गुरुनानक देव की 550वीं जयंती के मद्देनजर लिया है। अब भारत और पाकिस्तान के सिख श्रद्धालु गुरुद्वारे में दर्शन के लिए जा सकेंगे। पिछले दिनों इसे उच्चाधिकारियों और सिख समुदाय के सदस्यों की मौजूदगी में हुए एक समारोह के दौरान खोला गया।
सिख समुदाय के लोगों ने अरदास की
गुरुद्वारा खुलने के बाद सिख समुदाय ने यहां अरदास (प्रार्थना) और कीर्तन (भक्ति गीत) की प्रस्तुति दी। इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) के चेयरमैन डॉ. आमीर अहमद इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। डॉ. अहमद पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के पवित्र स्थलों की देखरेख का जिम्मा संभालते हैं। इस कार्यक्रम में पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार सतवंत सिंह भी मौजूद थे।
भारत के सिख ‌श्रद्धालु भी यहां आ सकेंगे
ईटीपीबी के प्रवक्ता आमीर हाशमी ने बताया, ‘‘गुरुद्वारा चोवा साहिब को प्रार्थना और दर्शन के लिए खोला गया है। इसमें भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों से सिख समुदाय के लोग दर्शन के लिए आ सकते हैं। इस ऐतिहासिक जगह पर आने के लिए सभी का स्वागत है। गुरुद्वारे का जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है।’’
मान्यता: गुरुनानक ने प्रथ्वी पर प्रहार कर सूखे का परेशानी दूर की थी
गुरुद्वारे का निर्माण 1834 में महाराजा रणजीत सिंह ने कराया था। माना जाता है कि गुरुनानक देव तिल्ला जोगियन मंदिर से लौटने के बाद यहीं पर ठहरे थे। तब यह इलाका भयंकर सूखे की चपेट में था। गुरुनानक ने पृथ्वी पर प्रहार किया और वहां एक पत्थर निकला। फिर इस स्थान पर पानी का स्रोत (चोवा) का पता चला। पिछले दिनों पाकिस्तान के पूर्वी शहर सियालकोट में प्राचीन शवला तेज सिंह मंदिर को भी 72 साल बाद खोला गया था।
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