Press "Enter" to skip to content

पेट्रोल कंपनियों की बनाई फर्जी वेबसाइट, फिर ऐसे ठगे 50 करोड़ ! Bhopal News

Fraud in Petrol Pump Dealership : पेट्रोल कंपनियों की बनाई फर्जी वेबसाइट, फिर ऐसे ठगे 50 करोड़
भोपाल। पेट्रोल पंप की डीलरशिप के लिए फर्जी वेबसाइट के जरिए लोगों से रुपए ऐंठने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का मप्र की सायबर पुलिस द्वारा पर्दाफाश किया है। दो वेब डेवलपर ने सरकारी सार्वजनिक कंपनियों और प्रतिष्ठित कंपनियों की 22 फर्जी वेबसाइट्स तैयार की थीं। इनके जरिए इन्होंने मप्र के भोपाल, कटनी, मुरैना शहर सहित गुजरात, राजस्थान व बिहार आदि राज्यों में कई लोगों से पेट्रोल पंप डीलरशिप के लिए लगभग 50 करोड़ रुपए ठग लिए।
वेबसाइट बनाने वाले ग्राम 12 हवेली कोसाम्बी, इंद्रापुरम् गाजियाबाद के वरुण कुमार मिश्रा और पठानवाड़ी मलाड (ईस्ट) मुंबई के मोहम्मद अनवर खान को मध्यप्रदेश की सायबर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। अब उनसे इस तरह की वेबसाइट बनवाने वाले मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है।

यह जानकारी मप्र सायबर पुलिस के विशेष पुलिस महानिदेशक पुरुषोत्तम शर्मा ने सोमवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान दी। उन्होंने बताया कि भोपाल के एक पीड़ित संजय मीणा ने सायबर पुलिस में शिकायत की थी कि ‘पेट्रोल पंप डीलरशिप चयन डॉट को” वेबसाइट के माध्यम से पेट्रोल पंप डीलरशिप देने के नाम पर आवेदन मंगाया और फिर उसी नाम के एक चालू खाते में 15 लाख 32 हजार रुपए जमा करा लिए।
गुजरात, राजस्थान, बिहार में भी पीड़ितों के होने की सूचना

काफी समय तक कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें संदेह हुआ और सायबर पुलिस में शिकायत की। जांच में वेबसाइट के बैंक अकाउंट को फ्रीज कराकर पीड़ित के दो लाख 53 हजार रुपए वापस भी कराए गए। जांच करने पर कटनी, मुरैना में भी इसी वेबसाइट से अन्य पीड़ितों से राशि ठगे जाने की जानकारी लगी। मप्र में पेट्रोल पंप डीलरशिप दिलाने के नाम पर वेबसाइट संचालकों ने करीब 70 लाख ठगे। जांच में गुजरात, राजस्थान, बिहार में भी पीड़ितों के होने की जानकारी लगी।
राज्यों के डीजीपी को पत्र

विशेष पुलिस महानिदेशक शर्मा ने बताया कि पेट्रोल पंप डीलरशिप ठगी की जांच के लिए एसपी सायबर भोपाल विकास कुमार शाहवाल के नेतृत्व में एसआईटी बनाई गई है। ओएलएक्स, बीमा कंपनियों, ओटीपी पूछकर और नौकरी दिलाने के नाम पर ऑनलाइन ठगी के मामलों में भी वृद्धि हुई है। इनकी जांच के लिए अलग से एसआईटी का गठन किया है। पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाएं ज्यादा हो रही हैं। फर्जी पेट्रोल पंप डीलरशिप वेबसाइट का पता लगने के बाद जब दूसरी ऐसी वेबसाइटों की पड़ताल की गई तो ऐसी 22 वेबसाइट्स मिलीं।
बैंक अफसरों की मिलीभगत

शर्मा ने बताया कि गिरोह ने बेंगलुरु, पश्चिम बंगाल व झारखंड के भारतीय स्टेट बैंक की शाखाओं में चालू खाते खुलवाए थे, जिनमें वे पीड़ित लोगों से रुपए जमा करवाते थे। गिरोह के सदस्य चालू खाते का संचालन व्यक्तिगत रूप से करते और उसमें से दूसरे खातों में राशि ट्रांसफर करते थे। शर्मा से जब पूछा गया कि चालू खाते खुलवाने वाले और जिन दूसरे बैंकों के खातों में राशि ट्रांसफर हुई है, उनके बारे में कुछ सुराग लगा तो उन्होंने कहा, यह विवेचना में है। हालांकि शर्मा ने यह जरूर कहा कि चालू खाते का व्यक्तिगत रूप से संचालन होने पर यह आशंका है कि धोखाधड़ी करने वालों के साथ बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत भी होगी।
More from Fast SamacharMore posts in Fast Samachar »

Be First to Comment

Leave a Reply

error: Content is protected !!