
ग्वालियर। 3 हजार से ज्यादा आबादी वाले न्यू आदित्यपुरम में सिर्फ एक ट्रांसफार्मर है। जिस 5 हजार से ज्यादा रंग-बिरंगे तार देखकर मकड़ी का जाल लगता है। हैरत भरी नजरों से जब गौर से देखा तो समझ आया कि लोगों ने अपने तार को पहचानने के लिए गजब का दिमाग लगाया है।
किसी ने तार पर कोल्डड्रिंक की बोतल का ढक्कन, घुंघरू, माता की चुनरी तो कई लोग तार पर इलेक्ट्रिक टेप लगाकर अपना नाम तक लिख गए हैं। जो व्यक्ति तार नहीं पहचान पाता वह घर से मोबाइल लेकर आता है और डीपी पर लगे तारों को हिलाकर घर पर पूछता है लाइट आई क्या? नहीं आई तो दूसरा तार हिलाता है। जिस तार से लाइट आ जाए समझो यह तार उनका है। यह व्यवस्था न्यू आदित्यपुरम के लोगों ने अपने स्तर पर कर रखी है।
कही नहीं हैं बिजली पोल, बांस पर लटके हैं कटे लगे तार
न्यू आदित्यपुरम में सिर्फ एक ट्रांसफार्मर है, जबकि पूरे क्षेत्र में कोई इलेक्ट्रिक पोल नहीं। लोगांे ने खुद दूर-दूर तक तार खींचने के लिए अस्थायी तौर पर बांस की बल्लियों को गाढ़कर पोल लगाए हैं। इन बांस पर तार कसते हुए अपने-अपने घर तक पहुंचाए हैं। जब भी आंधी या तेज बारिश होती है, यह बांस जमीन पर आ गिरते हैं और तार ट्रांसफार्मर से निकल जाते हैं। लोग ऐसे हालात में फिर वहां पहुंचते हैं और जान पर खेलकर उसे जोड़ते हैं।

ये कैसी व्यवस्था – पोल हैं नहीं, मीटर लगाकर बिल वसूल रही कंपनी
क्षेत्र में पोल और ट्रांसफार्मर लगाकर व्यवस्था बनाने में बिजली कंपनी को कॉलोनी का अवैध होना रोड़ा बन रहा है। लेकिन अफसर यहां अस्थायी मीटर देकर मोटा बिल जरूर वसूल रहे हैं।
पूर्व मंत्री भी कर चुकी थी बिजली स्थायी का वादा
कॉलोनी के रहवासियों का आरोप है कि पूर्व मंत्री माया सिंह ने पहले जब चुनाव में प्रत्याशी थी तब आदित्यपुरम में बिजली, पानी सड़क की स्थायी व्यवस्था का वादा रहवासियों से किया था। चुनाव जीतने के बाद पांच साल मंत्री रहीं, लेकिन कुछ भी नहीं किया।





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