प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। वाहन खरीदने के बाद 7 दिन में शो-रूम से
व्हीकल आईडेंटीफिकेशन होगा। इसमें तीन ऑप्शन रहेंगे। पहला रेग्युलर नंबर,
इसमें आईडी के आधार पर कोई भी नंबर मिल सकता है। दूसरा ऑप्शन रहेगा जंपिंग
नंबर, इसमें वाहन मालिक मनपसंद का नंबर खरीद सकता है। जंपिंग नंबर पाने के
लिए कार मालिक को 5000 व बाइक मालिक को 2000 रुपए चुकाने होंगे। तीसरा
ऑप्शन रहेगा नीलामी का। इसमें वीआईपी नंबर मिलेंगे। इसमें नंबरों के सामने
लिखी रकम चुकाना होगी। यह 5 000 से लेकर 50000रुपए से ज्यादा तक है। ऑनलाइन
व्यवस्था से पुरानी व्यवस्थाएं बंद हो गई हैं। कर्मचारी भी वाहन मालिक से
रुपए वसूलकर मनचाहा नंबर दे देते थे। साथ ही कई लोग अफसरों के पास
सिफारिशें लेकर आते और मनपसंद नंबर ले जाते थे। सिफारिशों के कारण अफसर,
कर्मचारियों को भी नंबर उपलब्ध करवाने में दिक्कत होती थी। अब पूरी
प्रक्रिया ऑनलाइन होने से मेन्युअली कुछ नहीं कर पाएंगे। ऑनलाइन प्रक्रिया
नहीं होने से रजिस्टर पर नंबर लिखकर देना पड़ रहे थे। समय ज्यादा लगता था।
नंबर देने में देरी हो रही थी। परिवहन विभाग का कहना है कि गाड़ियों के नंबर
की च्वाइस फिलिंग ऑनलाइन होने से नंबर जारी करने की प्रक्रिया में
पारदर्शिता आएगी। लोगों को शिकायत होती थी कि मन का नंबर लेने के लिए आरटीओ
विभाग में ज्यादा पैसे लग गए। अब ऑनलाइन प्रक्रिया से सब कुछ क्लियर
रहेगा।
ऐसे मिलेगा ऑनलाइन नंबर
वाहन मालिक की शो-रूम पर ही व्हीकल आइडेंटी बनाई जाएगी। इसके लिए
शो-रूम संचालकों की पोर्टल पर आईडी बनाकर पासवर्ड दिया है। व्हीकल आइडेंटी
बनने के बाद वाहन मालिक को नंबर मिलेगा। इसके बाद शो-रूम से कर्मचारी लिए
गए नंबरों की फाइल एआरटीओ कार्यालय लाएगा। यहां नंबरों का रजिस्ट्रेशन
होगा। इसके बाद वाहन मालिक को नंबर आवंटित हो सकेंगे।





Be First to Comment