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करैरा क्षेत्र की मूंगफली मिलों पर अल्प वर्षा का असर  40 में से बमुश्किल 15 चालू, वह भी बंद होने की कगार पर  अल्प वर्षा, घटता रकवा, पलायन को विवश मजदूर 

करैरा। शिवपुरी जिले में इस बार हुई अल्प वर्षा का सबसे अधिक असर करैरा ब्लॉक मुख्यालय पर संचालित मूंगफली की मिलों पर पड़ा है। स्थिति यह है कि यहां संचालित 40 मिलों में से वर्तमान में बमुश्किल 15 मिल ही संचालित हैं। उन पर भी मूंगफली की आवक कम होने के चलते बंद होने का खतरा बना हुआ है। 

जानकारी के मुताबिक करैरा क्षेत्र में संचालित 40 मूंगफली मिलों से करीब दो हजार मजदूरों को रोजगार मिलता था। लेकिन अल्प वर्षा के चलते पहले तो मूंगफली का लगातार रकबा घटता चला गया और वहीं दूसरी ओर जिन किसानों मूंगफली पैदा की उनकी क्वालिटी घट गई जिससे उन्हें सही दाम नहीं मिल पाया।  खास बात यह है कि करैरा क्षेत्र की मूंगफली मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली तक सप्लाई होती है। लेकिन इस बार व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कृषि विभाग के मुताबिक वर्ष 2014-15 में मूंगफली का रकबा 33 हेक्टेयर में था जो, वर्ष 2015-16 में 25 हेक्टेयर जबकि 2016 -17 में 18 हेक्टेयर रह गया। इस वर्ष में जीएसटी से व्यापारियो पर भारी असर पड़ा है। शुरूआत से ही करैरा मण्डी के अंदर मूंगफली के भाव अच्छे नही मिले।

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एक एक व्यापारी मण्डी से लाता था ढाई हजार बोरी

करैरा कृषि उपज मण्डी की स्थिति देखी जाए तो पूर्व के अन्य वर्षो में मण्डी के अंदर 500 से 700 गाडिय़ा आती थी और एक एक व्यापारी एक दिन ढाई हजार बोरी खरीद कर ले जाया करता था लेकिन आज यह स्थिति है कि मण्डी में 20 और 50 गाडिय़ां ही आ रही हैं। व्यापारी किसानों से जहां ढाई हजार बोरी लेकर अपने मिलों पर ले जाते थे वह आज मात्र 300 ही बोरी लेकर ही जा रहे हैं। 

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इनका कहना है

करैरा बैल्ट के सिरसौद, अमोलपठा में पिछली साल मूंगफली की अच्छी खेती हुई थी लेकिन इस वर्ष तो दिनारा में भी मूंगफली की अच्छी पैदावार नही हुई। 

रामजी गोयल, मिल संचालक 

-हमारे खेत में मूंगफली की फसल पिछले साल की अपेक्षा इस वर्ष वर्षा न होने से अच्छी नही हुई है। जिसके चलते इस बार पिछले साल की अपेक्षा दाम बिलकुल ठीक नही है।

हरनाम सिंह, ग्रामीण हाजीनगर

-हमारे यहाँ पर मूंगफली की फसल पिछले दो साल से बिलकुल ठीक नही आ रही है। पिछले साल नोटबन्दी और इस साल जीएसटी लागू होने के कारण मण्डी में मूंगफली की आवक कम हो गई है।जिसके कारण करैरा के व्यापारियों को काफी नुकसान हुआ है। साथ ही किसानों को उनकी फसल का सही दाम भी नही मिल पा रहा है।

दिलीप सिंघल, व्यापारी करैरा

करैरा में लगभग 25 हजार हैक्टेयर क्षेत्रफल में मूंगफली की खेती होती थी लेकिन इस वर्ष सिर्फ 18 हजार 6 75 हेक्टेयर में ही फसल हुई है। अल्प वर्षा के चलते इस बार मूंगफली की क्वालिटी ठीक नही है। यही कारण है कि किसानों को उनकी फसल का मण्डी में सही दाम नही मिल पा रहा है।

वायएस यादव, कृषि विकास अधिकारी करैरा

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