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3 माह की मासूम की जान बचाने खिड़की से फेंका

chiku 2017917 10430 17 09 2017ग्वालियर। शुक्रवार-शनिवार दरमियानी रात एसएएफ की 14
बटालियन की 96 नंबर लाइन में पूरा एक ब्लॉक भीषण आग की चपेट में आ गया।
ब्लॉक के चार क्वार्टर में कुल 19 लोग आग के बीच फंसे थे। किसी को कुछ समझ
नहीं आ रहा था। 11 लोग जो दूसरी मंजिल पर फंसे थे वह पहली मंजिल पर आए और
वहां से बिल्डिंग के पीछे की तरफ कूदकर जान बचाई, जबकि 8 लोग ग्राउड फ्लोर
पर फंसे थे। आग ने चारों तरफ से लोगों को घेर रखा था। अंदर फंसे लोगों ने
किसी तरह टॉयलेट के अंदर की सीमेंट की जाली को ता़डा। इसके बाद 24 वर्षीय
प्रियंका ने 3 महीने की बेटी को बचाने लिए सबसे पहले उसे खिड़की से बाहर
फेंका। वहां खड़े अन्य लोगों ने उसे कैच कर लिया। इसके बाद खिड़की से निकलकर
अपनी जान बचाई।
कंपू थाना क्षेत्र स्थित किरार कॉलोनी के सामने 14
बटालियन की 96 नंबर लाइन है। शुक्रवार-शनिवार दरमियानी रात 2 बजे के लगभग
96 नंबर लाइन के एक ब्लॉक में अचानक आग भड़क गई। आग ने 20 मिनट में पोर्च से
होते हुए ब्लॉक के चारों क्वार्टरों को घेर लिया। जब आग से पूरा ब्लॉक घिर
गया और आग अंदर कमरों तक पहुंची तो लोगों की नींद टूटी। आग की लपटें सबसे
पहले दूसरी मंजिल पर 68 नंबर क्वार्टर निवासी आरक्षक बलराम पाराशर ने देखी।
इसके बाद उन्होंने शोर मचाया और पूरे ब्लॉक के लोगों को बचाने का प्रयास
किया।
उनके कमरों तक आग पहुंच गई थी। बलराम अपनी पत्नी रेखा, बच्चे
प्रान्जल, अनुष्का, आनंद को लेकर पहली मंजिल की बालकनी में आए। साथ ही 67
नंबर क्वार्टर निवासी चन्द्र पाल सिंह परिहार के परिवार पत्नी ऊषा, मयंक,
शालू व अभिषेक को भी उनके घरों से निकालकर पहली मंजिल की बालकनी तक पहुंचे।
पर यहां पहुंचकर स्थिति और खराब थी।
बाहर निकलने के रास्ते पर आग
विकराल रूप धारण कर चुकी थी। ऊपर भी आग की लपटें दिख रही थीं। जब कोई
रास्ता नहीं दिखा तो 11 लोग पहली मंजिल 10 फीट की ऊंचाई से एक-एक कूदते चले
गए। कूदने के दौरान कुछ लोगों को चोट आई, लेकिन जान बचाना प्राथमिकता था।
8 लोगों की जान बचाना बना चुनौती
ब्लॉक
के ग्रांड फ्लोर पर 66 नंबर क्वार्टर एएसआई अशोक कुमार का है। वह अपने
परिवार के 8 सदस्यों जिसमें एक 3 माह की नातिन भी थी उनको लेकर फंसे थे।
दरवाजा आग से झुलस रहा था। जिससे वे घर से बाहर नहीं निकल सकते थे। किचन की
लोहे की जाली उखड़ नहीं रही थी। घर में धुआं भरने से सांस लेना तक मुश्किल
हो रहा था। किसी तरह टॉयलेट में लोग पहुंचे। इसमें लगी एक सीमेंट की जाली
को फोड़ा। करीब 2 से ढाई फीट की जगह निकली। यहां से सबसे पहले अशोक की पुत्र
बधु प्रियंका की गोद में 3 माह की मासूम चीकू को खिड़की से बाहर फेंका बाहर
खड़े कॉलोनी के अन्य लोगों ने उसे बचाया। इसके बाद अन्य परिजन अशोक, पत्नी
विमलादेवी, सुशीला, रेखा, प्रियंका, संतराम, मीरा आदि बाहर निकले।
कैसी लगी आग, क्या हुआ नुकसान
आग
रात 2 से 2.15 के बीच लगी। ब्लॉक के पोर्च में मीटर पूरी तरह जला है उसके
नीचे तीन बाइक रखी थीं जो पूरी तरह जल गईं। साथ ही दो साइकिल, चारों
क्वार्टर और उनमें रखा सामान जल गया। घटना की सूचना रात को ही पुलिस को दी
गई। कम्पू पुलिस मौके पर पहुंची। दमकल की गाड़ियां भी पहुंचीं और आग पर काबू
पाया। नुकसान का अनुमान लाखों में है।
पेट्रोल चोरी का खेल, लगाई आग
स्थानीय
लोगों का कहना है कि आग लगी नहीं लगाई गई है। देर रात लोग यहां पेट्रोल
चोरी करते हैं। गाड़ियों से रोज पेट्रोल चोरी होता है। चोरी के दौरान
असामाजिक तत्वों ने पाइप खुला छोड़कर आग लगाई है। कम्पू पुलिस ने मामले की
जांच शुरू कर दी है।
2.37 बजे दूसरी मंजिल पर पहुंची आग
क्वार्टरों
में आग सवा दो बजे लगी है, लेकिन दूसरी मंजिल पर 68 नंबर क्वार्टर तक जब
आग पहुंची तो उस समय 2.37 बजे का समय हो रहा था। आग से घड़ी पिघली और समय
वहीं रुक गया।
सबसे पहले बेटी को बचाया
मुझे
खुद से ज्यादा टेंशन अपनी तीन महीने की बेटी की थी। बेचारी सांस भी नहीं
ले पा रही थी। जब खिड़की तोड़ी तो सबसे पहले बेटी को बाहर की तरफ फेंका। डर
लग रहा था, लेकिन उसकी जान बचाना थी। बाहर खड़े लोगों ने उसे गोद में कैच कर
लिया। इसके बाद मैं और मेरा परिवार बाहर निकला।

प्रियंका 3 माह की बेटी चीकू की मां
बेटे को गीला कंबल ओढ़ाकर बचाया
मुझे
खुद से ज्यादा अपने 17 वर्षीय बेटे आशीष की चिंता थी। आग की लपटें घर में
घुस रही थीं। सबसे पहले कंबल निकाला उसे गीला किया और बेटे को उड़ाकर आग की
लपटों से बाहर निकाला। इसके बाद घर में रखे सिलेंडरों को अंदर पानी की टंकी
में डाला और बाहर आई।

शांतिदेवी पत्नी एएसआई कमलचन्द्र
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