‘हत्या या आत्महत्या’ के बीच झूल रहा यह शव 38 दिनों से थाने में पड़ा है

अब इसे सरकारी सिस्टम की लापरवाही नहीं तो और क्या कहेंगे कि पिछले 38 दिनों से सुल्तानपुर के एक थाने में एक शव का अंतिम संस्कार महज इसलिए नहीं किया जा सका है क्योंकि अभी तक यह तय ही नहीं हो पाया है कि यह हत्या है या आत्महत्या.
हालांकि परिजनों का कहना है कि भभोट अहिरौली गांव का रहने वाला 38 वर्षीय शशि कुमार की हत्या की गई है, लेकिन पुलिस इसे मानने को तयार नहीं है. ताज्जुब की बात यह है कि तमाम अत्याधुनिक संसाधनों से लैस होने का दावा करने वाली पुलिस और फोरेंसिक टीम पिछले एक महीने से इस मामले में कोई ठोस रिपोर्ट देने की बजाय हीला हवाली कर रही है. आरोपियों के खिलाफ अब तक कोई कार्यवाही न होने और अंतिम संस्कार न कर पाने से दुखी परिजन आये दिन थाने का चक्कर काटने को मजबूर हैं.
पुलिस की संवेदनहीनता
जयसिंहपुर थाना परिसर के अंदर रखा यह ताबूत पिछले 38 दिनों से दाह संस्कार को तरस रहा है. इसके अंदर रखे शव को लेकर हत्या और आत्महत्या को लेकर सस्पेंस है, लिहाजा इसे यूं ही रख दिया गया. जबकि कायदे से इसको मरचरी या सुरक्षित जगह पर रखना चाहिये था.
क्या है मामला?
दरअसल इसी थाना क्षेत्र के भभोट अहिरौली गांव का रहने वाला 38 वर्षीय शशि कुमार करीब डेढ महीने पहले अचानक घर से गायब हो गया था. 15 दिनों बाद 6 नवम्बर को गांव के बाहर एक सुनसान स्थान पर उसका शव पेड़ से लटका मिला. परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए थाने पर तहरीर दी. परिजनों के मुताबिक गांव के ही कुछ लोग उसे बुलाकर ले गये थे. लिहाजा पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज कर लिया था. आरोप है कि लापरवाह पुलिस ने इसे हत्या और आत्महत्या के बीच उलझाकर आरोपियों के खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं की. शशि की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा.
डाक्टरों द्वारा पोस्टमार्टम से मौत के कारणों का पता न चल सका लिहाजा डॉक्टरों की सलाह पर मृत्यु के स्पष्ट कारणों की जानकारी के लिये शव को विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजा गया. वहां के कर्मचारियों द्वारा शव की विशेष तकनीक से जांच की बात कहकर शव को वापस थाने भेजवा दिया. बाद में टीम ने आकर जांच पड़ताल की और बोन लेकर चले गए.
तब से पुलिस रिपोर्ट आने का इंतजार कर रही है. मृतक शशि के भाई बजरंगी का आरोप है कि शशि की हत्या की गई लेकिन पुलिस मानने को तयार नहीं और न ही आरोपियों के खिलाफ कोई कार्यवाई कर रही. तमाम दौड़ भाग के बाद भी उसे शव नहीं दिया जा रहा.
क्या कहना है पुलिस का?
पुलिस अधीक्षक विनय कुमार के मुताबिक़ 5 दिसंबर को मृतक के परिजनों को नोटिस द्वारा सूचना दे दी गई थी, लेकिन परिजनों ने शव को लेने से इनकार कर दिया. उनका कहना है कि आरोपियों के खिलाफ कार्यवाई की जाए तब ही वे शव लेंगे. जबकि मौत के कारणों की स्पष्ट रिपोर्ट आने तक कार्यवाई संभव नही है.






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