करैरा। करैरा अनुविभाग के दर्जनों पंचायतों में महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के तहत गो शालाओं का निर्माण हुआ है। इन सभी जगहों पर सरपंच सचिवों ने जपं के अधिकारियों इंजीनियरों से मिलकर लाखो के बारे न्यारे कर दिए। लाखों खर्च होने के बाद भी इनका कोई उपयोग नहीं है। उदाहरण के तौर पर ग्राम सिरसौद, अमोला क्रेसर, डामरौन खुर्द में सहित कई पंचायतों में 34 लाख रुपये की लागत से बनाई गई आवारा मवेशियों के लिए गोशाला इन दिनों वीरान पड़ी हुई है। भले ही शासन प्रशासन लाखो करोडों खर्च करके गोशाला बनवा दी हो, लेकिन उनको अभी भी आशियाना नशीब तक नही हुआ। कुछ पंचायतों में काम अभी भी जारी बना हुआ है। पंचायत स्तर पर बन रही गोशालाओं का निर्माण रोजगार गारंटी योजना के तहत मजदूरो से किया जाना था, लेकिन ग्राम के सरपंच सचिवों ने अपने फायदे के लिए मजदूरो की जगह मशीनों से काम कराया और वो भी घटिया स्तर से हुआ है। यदि इनकी निष्पक्ष रूप से जांच करा ली जाए तो बहुत बड़ा घपला उजागर हो जाएगा।
मप्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय प्रदेश भर में गोशालाओं का निर्माण कराया गया था। इसके चलते करैरा विधानसभा की पहली गोशाला का उद्घाटन ग्राम मगरौनी में पूर्व पशुपालन मंत्री लाखन सिंह यादव ने किया था। इसके साथ साथ करैरा ब्लाक में चार गोशालाएं स्वीकृत हुई थी जिनमे से एक आदर्श ग्राम सिरसौद, अमोला क्रेसर, थनरा, दवरा दिनारा में इन आवारा जानकारों के लिए पूर्व विधायक जसमन्त जाटव ने स्वीकृत कराई थी। इसमें से एक ग्राम सिरसौद की तो बनकर भले ही तैयार हो गई हो, लेकिन गाय आज तक नही बांधी गई। जो बनकर तैयार हो गई तो उनका कोई इस्तेमाल नही हो रहा है और मवेशी सड़कों पर घूम रहे हैं।
इनका कहना है
एक जानवर के लिए 20 रुपये का खर्चा देने की बात कही जा रही है। इतने कम पैसों मे कैसे हम इन जानवरो को खिलाएंगे। हमारे गांव में 100 से ज्यादा आवारा मवेशी है जो सड़को पर घूमते हैं।
रामलली अतर सिंह लोधी, ग्राम प्रधान सिरसौद ।




