इंदौर, । शहर में लगातार हो रहे निर्माण और पेड़ों की कटाई का असर हरियाली पर हो रहा है। शहर के 6 व्यक्ति ऑक्सीजन के लिए एक पेड़ पर निर्भर हैं। विकास के चलते पेड़ों को हो रहे नुकसान से यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। पर्यावरणविद् डा़ॅ ओपी जोशी ने पेड़ों की कटाई पर रिसर्च किया तो यह जानकारी सामने आई। यूनाइटेड नेशन की स्टडी के अनुसार स्वस्थ रहने किसी भी शहर में एक व्यक्ति के लिए एक पेड़ होना आवश्यक है।
वन विभाग व नगर निगम के पास पुराने पेड़ों को लेकर रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। अवैध कटाई,आंधी-तूफान में गिरे पेड़ की जानकारी लेकर इस रिसर्च को पूरा किया गया है। डॉ. जोशी के अनुसार इस समय शहर में 5 लाख पेड़ हैं, जबकि आबादी करीब 30 लाख तक पहुंच चुकी है। 1 जनवरी से 22 दिसंबर तक शहर में 23 स्थानों पर 129 पेड़ काटे गए।
यहां हुआ पेड़ों को नुकसान
– 5 जून को आंधी से 13 पेड़ गिरे।
– 15 जून को पश्चिमी क्षेत्र में 30 पेड़ गिरे।
– 27 अगस्त को संवाद नगर स्थित 350 साल पुराने पेड़ का एक हिस्सा गिरा।
– विजय नगर में धार्मिक आयोजन के लिए 11 पेड़ काटे गए।
– नगर निगम ने शौचालय निर्माण के लिए 17 पेड़ काटे।
– मेडिकल कॉलेज परिसर में 40 पेड़ काटे गए।
यहां बचाए कई पेड़
– आजाद नगर से नौलखा के बीच सड़क निर्माण में 50 पेड़।
– बड़ा गणपति से जिंसी चौराहे के बीच सड़क निर्माण में 12 पेड़।
– मालवा मिल से पाटनीपुरा के बीच रास्ता बदल बरगद व नीम बचाए।
– बीआरटीएस व अन्य स्थानों पर 500 पेड़ कांक्रीट से मुक्त किए जा रहे हैं।
– बांगड़दा संपत कॉलोनी में झंवर परिवार ने 50 पेड़ों को सुरक्षित जगह लगवाया।
इन स्थानों पर कटे पेड़
रिसर्च टीम के अनुसार 2017 में उषा ट्रस्ट सर्वेंट क्वार्टर, राजमोहल्ला, पीपलियापाला मैरिज गार्डन, जयरामपुर कॉलोनी के पास सरकारी जमीन, मेडिकल कॉलेज परिसर, कमला नेहरू उद्यान के पास, खजराना गणेश मंदिर के पास, केसरबाग में निजी स्कूल, साधु वासवानी नगर, सत्यम टॉकीज, विजय नगर के पास, त्रिवेणी कॉलोनी, केंद्रीय संग्रहालय, दशहरा मैदान, बंगाली चौराहा व आईडीए स्कीम नंबर 103 में पेड़ काटे गए। नगर निगम और वन विभाग को शहरी क्षेत्र में पेड़ों की पूरी जानकारी नहीं है। दोनों विभाग पांच साल में कितने प्रतिशत पेड़ कम हो चुके हैं, यह भी नहीं बता सके।
गंभीर होने की जरूरत
पुराने पेड़ों की कटाई के चलते आने वाले समय में प्रति पेड़ निर्भर होने वाले व्यक्तियों की संख्या बढ़ेगी। इस पर प्रशासन व पर्यावरणविदों के साथ ही हर व्यक्ति को गंभीर होने की आवश्यकता है। -डॉ. ओपी जोशी, पूर्व प्राचार्य गुजराती साइंस कॉलेज
कम हो रहा है हरित क्षेत्र
कई शहरों में हरित क्षेत्र 22 सालों में 66 से घटकर 22 प्रतिशत तक पहुंच गया है। आने वाले समय में यह संतुलन 11 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है। इसलिए हम सभी को नए पेड़ लगाने के साथ ही पुराने पेड़ों को बचाना होगा। -प्रोफेसर टीवी रामचंद्रन, एनर्जी एंड वेटरलैंड ग्रुप बेंगलुरू
प्लांटेशन किया जाता है
जहां लगता है कि पेड़ हटाना आवश्यक नहीं है उन स्थानों को छोड़ देते हैं। सड़क के बीच में पेड़ रहने से एक्सीडेंट का खतरा हमेशा बना रहता है। संतुलन बनाए रखने के लिए नया प्लांटेशन किया जाता है। -महेश शर्मा, सिटी इंजीनियर, नगर निगम
निशुल्क पौधा वितरण
नगर निगम व आईडीए के साथ मिलकर हर साल विभाग पौधारोपण करता है। वन विभाग की नर्सरी में पौधे तैयार करते हैं और सामाजिक संस्थाओं को निशुल्क पौधे दिए जाते हैं। यह व्यवस्था केवल बारिश के दौरान पौधारोपण के लिए होती है। -पुरुषोत्तम धीमान, सीसीएफ






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