- आयुक्त ने इंदौर, ग्वालियर और भोपाल समेत चंबल संभाग के संभागायुक्तों से तैयारियां पूरी रखने को कहा
- खंडवा में 12 घंटे में 5 इंच बारिश हुई, गर्ल्स हॉस्टल की दो मंजिल डूबीं, 150 छात्राओं का रेस्क्यू
भोपाल. प्रदेश में लगातार बारिश से बाढ़ की आशंका के बीच राहत आयुक्त ने 27 जिलों के कलेक्टरों को अलर्ट जारी किया है। स्थानीय मौसम केंद्र ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में अगले 48 घंटों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
राहत आयुक्त की ओर से ये अलर्ट आगर, अलीराजपुर, अशोकनगर, बालाघाट, बड़वानी, अनूपपुर, बुरहानपुर, धार, डिंडोरी, गुना, हरदा, होशंगाबाद, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, छिंदवाड़ा, मंदसौर, नीमच, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, सिवनी, श्योपुर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा के जिला कलेक्टरों को भेजा गया है। आयुक्त ने उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, शहडोल, नर्मदापुरम, भोपाल और चंबल संभाग के संभागायुक्तों को भी तैयारियां पूरी रखने को कहा है।
नर्मदा उफान पर: खंडवा में तो एक दिन में 8 इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इसके चलते नर्मदा नदी का जलस्तर भी बढ़ गया है और जिले के निचले इलाकों में पानी भर गया है। वहीं राजधानी भोपाल भी पानी-पानी हो गई है। मंगलवार को दिन में भी तेज बारिश हुई है। निचली बस्तियों में पानी भर गया है।
तेजी से बढ़ रहा बड़े तालाब का जलस्तर : लगातार हो रही बारिश के चलते बड़ा तालाब भी लबालब हो गया है। बड़े तालाब में जलस्तर 1661.40 फीट पर पहुंच गया है। सीहोर में कोलांस नदी उफान पर है इसका पानी 50 गांवो में फैल गया है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि देर रात तक बड़े तालाब का जलस्तर 1661.00 फीट तक पहुंच सकता है। तालाब की क्षमता 1666.80 फीट है। इसके बाद भदभदा के गेट खोले जाते हैं।
सबसे ज्यादा सक्रिय सिस्टम: मानसून के दूसरे सबसे सक्रिय सिस्टम ने सोमवार रात को भोपाल में जमकर बारिश कराई। मंगलवार को भी बारिश का दौर जारी है। सोमवार रात 8:30 बजे से 11:30 बजे तक करीब सवा चार इंच (107 मिमी) बारिश हुई। जबकि सुबह से देर रात 1 बजे तक 5.54 इंच (140.9 मिमी) बारिश रिकॉर्ड हुई। मंगलवार सुबह तक ये आंकड़ा 166.5 मिलीमीटर तक पहुंच गया। यह दो साल बाद जुलाई की सबसे तेज बारिश है।
कहां कितनी बारिश: भोपाल में 166.5, खंडवा 163, खरगौन 117.4, मंडला 61, होशंगाबाद 50.6, उज्जैन 32, शाजापुर 50, रतलाम 8.4, रायसेन 22.4, दमोह 22, इंदौर 18.8, बैतूल 19, पचमढ़ी 55, सिवनी 14.8, नरसिंहपुर 37.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
स्कूल की दीवार गिरने से चौकीदार की मौत: रायसेन के बरेली स्थित एक निजी स्कूल की जमीन धसकने से स्कूल की दीवार गिर गई। इसमें स्कूल के चौकीदार की मौत हो गई। बारिश के कारण ग्राम नानाखेड़ी नूरगंज सहित दो दर्जन गांव का सड़क संपर्क भी टूट गया। वहीं, रेलवे लाइन के अंडर ब्रिज में भी पानी भर गया है। रायसेन-विदिशा मार्ग भी बंद हो गया।
177 छात्राओं को सुरक्षित निकाला: खंडवा जिले के नदी-नाले भी उफान पर हैं। जिले के आशापुर में अग्नि नदी में आई बाढ़ ने खासी तबाही मचाई, जिससे गांव के 50 से ज्यादा मकान आधे डूब गए और सड़कों से संपर्क टूट गया। सोमवार को एक कन्या आदिवासी हॉस्टल के डूब में आने से 177 छात्राओं की जान सांसत में आ गई, जिन्हें राहत अमले ने सुरक्षित निकाला। वहीं ग्राम बड़गांव में एक स्कूली छात्रा साइकिल से नाला पार करते हुए बह गई। प्रशासन ने पूरे जिले को अलर्ट पर रखते हुए मंगलवार को एक दिन स्कूलों की छुट्टी घोषित की है।
ताप्ती नदी खतरे के निशान से ऊपर: बुरहानपुर जिले में भारी बारिश के चलते ताप्ती नदी खतरे के निशान से 10 मीटर ऊपर बह रही है। नदी का पानी शहर के निचले हिस्सों में घुसने से बाढ़ के हालात बन गए हैं। जिले में कुछ जगह बाढ़ की स्थिति के कारण नेपानगर का 8 से 10 गांवों से संपर्क टूट गया।
नैरोगेज रेल यातायात ठप: श्योपुर जिले में पिछले पांच दिन से हो रही बारिश से नैरोगेज रेलखंड के कालिया नदी पुल के कमजोर होने से रेलमार्ग कल पांचवें दिन भी ठप रहा। राजस्थान का कोटा मार्ग भी पार्वती नदी के उफान से चार दिन से बाधित है। श्योपुर जिला मुख्यालय स्थित प्राचीन किले की दीवार भी कल भारी बारिश के चलते ढह गई। किले में स्थित गुरु महल एवं बाला किले के मुख्य प्रवेशद्वार के बीच की लगभग 90 फीट की दीवार ढह गई।
नदी में बहे युवक का शव बरामद: श्योपुर जिले के मानपुर क्षेत्र की सीप नदी में बहे एक युवक का शव बरामद कर लिया गया। सोमवार शाम दयाराम आदिवासी (28) की लाश बरामद की गई। दयाराम भारी बारिश के बीच तीन दिन पहले मछली पकड़ने नदी में गया था, जहां संभवत: वह तेज बहाव में बह गया। वहीं, रघुनाथपुर थाना क्षेत्र में कल बघेड़ नाले में पानी के बीच 35 वर्षीय एक अज्ञात महिला की लाश भी पुलिस ने बरामद की। इसकी शिनाख्ती के प्रयास किए जा रहे हैं।
क्या होती है भारी बारिश और अति भारी बारिश: जब किसी शहर में 64.5 मिलीमीटर से लेकर 115.6 मिलीमीटर तक बारिश होती है, तो इसे भारी बारिश की श्रेणी में रखा जाता है। जबकि, 115.6 मिलीमीटर से 204.5 मिलीमीटर तक बारिश होने पर इसे अति भारी बारिश कहा जाता है।
मध्य प्रदेश एवं भोपाल के मौसम को प्रभावित करने वाले कारक
- एक कम दबाव का क्षेत्रफल पूर्वी मध्य प्रदेश उससे लगे छत्तीसगढ़ में बना हुआ है जो हवा के ऊपरी भाग में 5 .8 किलोमीटर की ऊंचाई तक बना है जो दक्षिण दिशा की ओर ऊंचाई के साथ झुका हुआ है।
- मानसून द्रोणिका मीन सी लेवल पर बाड़मेर चित्तौड़गढ़ विदिशा लो प्रेशर एरिया पूर्वी मध्य प्रदेश एवं उसे लगे छत्तीसगढ़ से जमशेदपुर बालासोर और दक्षिण पूर्व बंगाल की खाड़ी से होकर गुजर रहा है जो हवा के ऊपरी भाग में 2 . 1 मीटर की ऊंचाई तक बना हुआ है।
- हवा के ऊपरी भाग में चक्रवात दक्षिण पश्चिम राजस्थान एवं उससे लगे इलाके में बना हुआ है जो 3. 6 किलोमीटर की ऊंचाई तक है जो ऊंचाई के साथ दक्षिण पश्चिम दिशा की ओर झुका हुआ है।
- एक और द्रोणिका दक्षिण गुजरात एवं उससे लगे उत्तरी महाराष्ट्र से लेकर उड़ीसा के अंदरूनी हिस्से तक बना हुआ है जो पूर्वी मध्य प्रदेश एवं उसे लगे छत्तीसगढ़ से होकर गुजर रही है 4.5 एवं 7.6 किलो मीटर की ऊंचाई तक बना हुआ ह जो ऊंचाई के साथ दक्षिण दिशा की ओर झुका हुआ है।
- एक अन्य कम दबाव का क्षेत्र आगामी 4 अगस्त के आसपास उत्तर पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बनने की संभावना है।





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