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ट्रक ने पैर रौंदे, 18 ऑपरेशन हुए फिर भी डांस को नहीं छोड़ा

mohini bhopal girl 31 08 2017भोपाल। अस्पताल के बिस्तर पर सात माह का लंबा समय
गुजारने के साथ उसने 18 ऑपरेशन का दंश भी झेला। पैर बचाने के अथक प्रयास
में डॉक्टरों को घुटना भी निकालना पड़ा। रशियन पद्धति से हुई सर्जरी के कारण
फिलहाल उसका दायां पैर बाएं के मुकाबले तीन इंच छोटा भी हो गया है, लेकिन
जीवटता की मिसाल सात साल की मोहिनी जब पैर में ऑर्थोसिस (प्लास्टिक और मेटल
से बना सपोर्ट) लगाकर मयूर सी थिरकती है, तो माता-पिता की आंखों में खुशी
से आंसू छलक आते हैं।
करोंद के पास विश्वकर्मा नगर में रहने वाले
ब्रह्मशंकर शर्मा की इकलौती बेटी मोहिनी अब तीसरी कक्षा में पहुंच गई है।
मोहिनी की मां रश्मि बताती हैं 3 नवंबर 2015 का काला दिन वह अपने जीवन में
कभी नहीं भूल पाएंगी। दोपहर करीब ढाई बजे का वक्त था। घर के पास रुकी स्कूल
वैन से उनकी बेटी उतरी ही थी तभी मिनी ट्रक उसे रौंदते हुए निकल गया।
हादसे में उसका दायां पैर पूरी तरह कुचल गया था, जबकि दूसरे पैर में गंभीर
चोट लगी थी।
18 की उम्र में प्रत्यारोपण होगा
ब्रह्मशंकर
शर्मा बताते हैं मोहिनी फिलहाल ऑर्थोसिस की मदद से चल-फिर सकती है, लेकिन
घुटना नहीं होने से उसका पैर मुड़ता नहीं है। डॉक्टरों ने कहा कि मोहिनी के
14 वर्ष की होने पर पैर की लंबाई 3 इंच बढ़ाकर उसे बाएं पैर के बराबर का कर
दिया जाएगा। 18 वर्ष की होने पर घुटने का प्रत्यारोपण कर दिया जाएगा। इससे
पैर सामान्य तरह से काम करने लगेगा।
नर्सरी से ही नृत्य का शौक
ब्रह्मशंकर
बताते हैं मोहिनी के पैदा होने के बाद उसे बेटा समझकर परवरिश करने का
फैसला किया था। नर्सरी में एडमिशन के साथ ही उसकी रुचि नृत्य की तरफ बढ़ने
लगी। पैर में ऑर्थोसिस लगने के बाद उसकी प्रतिभा फिर सामने आने लगी है। अब
वह फिर भजन और फिल्मी गानों की धुन पर नृत्य करने लगी है। कमला देवी स्कूल
में तीसरी कक्षा में पढ़ रही मोहिनी काफी कुशाग्र है। स्कूल प्रबंधन ने भी
उसे बैठने के लिए विशेष कुर्सी दी है।
नवंबर में भर्ती, जून में डिस्चार्ज
मोहिनी
को नर्मदा अस्पताल में भर्ती कराया गया। माता-पिता के दिन-रात अस्पताल में
ही कटते रहे। हादसे की जानकारी मुख्यमंत्री के संज्ञान में आई। उन्होंने
बच्ची से मिलने के साथ ही उसके इलाज का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली।
नवंबर से जून तक सात माह के लंबे समय में मोहिनी के पैर के 18 ऑपरेशन किए
गए। पैर को पुनर्जीवित करने के लिए रशियन पद्धति का इस्तेमाल किया गया।
इसके तहत उसका घुटना निकाला गया है।
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