शिक्षक अध्यापक सम्मेलन में सांसद सिंधिया ने शिक्षकों को दी नसीहत, पैसा या पेशा समझकर नहीं बच्चों के भाग्य विधाता बनकर करें अपना कार्य

शिवपुरी। शहर के ऋषि गार्डन मैरिज हाउस में रविवार की देर शाम शिक्षक अध्यापकों के मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मांगें पूरी न होने के चलते सरकार से नाराज अध्यापकों पर ही चुटकी ले डाली। अध्यापक नेताओं ने जब मंच से प्रदेश सरकार व मुख्यमंत्री की वादा खिलाफी को लेकर उन्हें कोसा और क्षेत्रीय सांसद के समक्ष मांग रखी कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने पर पहली ही केबिनेट में अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन हो इसकी घोषणा सिंधिया मंच से करें इस पर सिंधिया ने अपने उद्बोधन के दौरान कहा कि पिछले 14 साल से हम कहते थे तो आप लोग मानते नहीं थे, मुझे आश्चर्य है कि शिक्षक और अध्यापक जैसे बुद्धजीवी वर्ग को सरकार का अहंकारी रूप समझने में 14 साल का समय लग गया। बिना मुख्यमंत्री का नाम लिए सिंधिया ने कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह अपने कर्मचारियों के हितों की रक्षा करे, लेकिन प्रदेश में ऐसा नहीं हुआ। सिंधिया ने अध्यापकों को भी नसीहत दी कि शिक्षक शब्द कोई पेशा नहीं है और न ही शिक्षकों को पैसे को प्राथमिकता में रखना चाहिए। उनके ऊपर देश व समाज के भविष्य निर्माण का दायित्व है इसलिए वे अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी से निभाएं, साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षकों को जरूरत है कि वह अपनी क्षमताओं में वृद्धि करें। मंच से सरकार को कोसने पर भी सिंधिया ने कटाक्ष किया कि सिर्फ मंच से चिल्लानेभर से कुछ नहीं होगा। परिवर्तन के लिए धरातल पर काम करना होगा। करीब दो घंटे चले इस आयोजन में जिलेभर से दो हजार शिक्षक व अध्यापकों ने भागीदारी की।
घोषणा से सिंधिया ने किया परहेज
सम्मेलन में अध्यापक नेता चाहते थे कि सिंधिया कांग्रेस की ओर से मंच से घोषणा करें कि प्रदेश में 2018 के विस चुनाव में यदि कांग्रेस की सरकार आए तो पहली ही केबिनेट में अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन किया जाएगा, लेकिन सिंधिया ने अपने भाषण के दौरान कहा कि वे घोषणा में विश्वास नहीं रखते। शिक्षकों को सम्मान मिलना चाहिए। कुल मिलाकर सीधेतौर पर सिंधिया ने अध्यापकों को शिक्षा विभाग में संविलियन की घोषणा से परहेज किया।
महाराज! मैं तो आपका दास हूं…
सांसद सिंधिया ने शिक्षकों के सम्मान में मंच से यहां तक कहा कि वे खुद को कभी भी शिक्षकों से ऊपर नहीं मानते, बल्कि खुद का स्थान शिक्षकों के चरणों में मानते हैं बावजूद कार्यक्रम में कई शिक्षक व अध्यापक नेता सांसद सिंधिया की चरण वंदना करते नजर आए। कार्यक्रम के आयोजक शिक्षक कांग्रेस के राजेन्द्र पिपलौदा ने तो यहां तक कहा कि महाराज मैं तो आपका दास हूं और मैं ही नहीं बल्कि मेरा परिवार पीढिय़ों से इस परंपरा को निभा रहा है। इसके अलावा अध्यापक नेता धर्मेन्द्र जैन ने भी जमकर कसीदे पढ़े तो वहीं धर्मेन्द्र रघुवंशी ने मंच बैठे वरिष्ठ कांग्रेस नेता बैजनाथ सिंह यादव की ओर इशारा करते हुए यहां तक कहा कि उन्हें ये नौकरी यादव ने ही दिलाई है। मंच से अध्यापक और शिक्षकों ने सांसद सिंधिया के जयकारे भी लगाए।
भाषण में फिसली जुबान
आयोजन के दौरान कई वक्ताओं की जुबान भी उद्बोधन के दौरान फिसल गई। अध्यापक नेत्री वंदना शर्मा ने भाषण के दौरान सांसद सिंधिया को क्षेत्र के लोकप्रिय प्रत्याशी कहकर संबोधित किया तो वहीं मंच संचालन कर रहे भरत तिवारी ने कांग्रेस नेता बैजनाथ सिंह यादव को जिला पंचायत अध्यक्ष कहा जबकि उनकी पत्नी कमला यादव अध्यक्ष हैं। इतना ही नहीं सांसद सिंधिया भी भाषण के दौरान विद्या की बजाय विधवा कह गए, हालांकि उन्होंने जल्दी अपने शब्द दुरुस्त किए।






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