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केदारेश्वर धाम जहां प्रकृति स्वयं 12 महीने करती भगवान शिव का जलाभिषेक हरे-भरे जंगल और पहाड़ धार्मिक स्थल की सुंदरता में लगा रहे चार चाँद

योगेंद्र जैन पोहरी– मप्र की प्रथम पर्यटक नगरी शिवपुरी जिला मुख्यालय से 33 किमी की दूरी पर प्राकृतिक स्थल ‘केदारेश्वर धाम जो कि पोहरी तहसील मुख्यालय से मात्र 3 किमी की दूरी पर शुक्ला नदी पर स्थित है। इस प्राकृतिक स्थल की सुंदरता में यहां पर स्थित हरे-भरे जंगल और पहाडा चार चाँद लगा रहे हैं। पहाड़ी के बीचों बीच स्थित केदारेश्वर महादेव का मंदिर जिसमें प्राकृतिक छोटी गुफा के अंदर भगवान शिव का प्राचीन शिवलिंग बना है और इसी छोटी गुफा के ऊपरी हिस्से पर पहाड़ से निकली हुई शीतल जल धारा वर्षभर भगवान शिव का प्राकृतिक जलाभिषेक करती है, साथ ही यहां प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर धार्मिक मेला लगता है जिसमें हजारों की संख्या में भक्तगण उमड़ते हैं। पुलिस एवं प्रशासन द्वारा मेले से पूर्व सुरक्षा की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली जाती हैं जिससे यहां आने वाले भक्तगणों को कोई परेशानी न हो।
केदारेश्वरधाम के इतिहास 500 वर्ष पूर्व का बताया जाता है। बताया जाता है कि इस प्राचीन मंदिर पर स्वयं योगेश्वर महादेव विरजमान है प्राचीन समय में सिद्ध सन्त श्री मंगलदास महाराज को सपने में भगवान शिवजी ने बताया कि मैं लिंग स्वरुप में पहाड़ों के बीच में विराजमान हूं मुझे निकालो, इसके बाद संतश्री ने तत्काल पोहरी के शासक राजा नवल खांडेराव को अपने स्वप्र के बारे में बताया। जिसके बाद राजा ने पहाड़ की खुदाई कराई जिसमें भगवान शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए। राजा ने तत्काल ही पहाड़ों पर मंदिर का निर्माण शुरू करवा दिया था। 500 वर्ष प्राचीन मंदिर शुक्ला नदी पर स्थित है जिसके दूसरी ओर पोहरी हुआ करती थी जो आज बूढ़ी पोहरी के नाम से विख्यात है। प्राचीन मंदिर जो अपनी प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जिले सहित प्रदेश में भी विख्यात है। मंदिर के चोरों ओर पहाड़ी होने के चलते पहाडियों के बीच से जल निरंतर गिरता रहता है। शिव लिंग के ठीक सामने ही एक कुण्डी है जिससे भक्तजन जलाभिषेक करते है जो गुप्त गंगा के नाम से प्रसिद्ध है। 

गौमुख से बह रहा जल स्वास्थ्य के लिए अमृत के समान-मंदिर की तीसरी मंजिल पर गौमुख स्थित है जिसमें से 500 वर्षो से अनवरत जलधारा बह रही है। यह जल पहाडिय़ों से निकलकर आने के कारण अनेक जड़ी बूटियों का मिश्रिण होने के कारण इसे स्वास्थ्य के लिए अमृत के समान माना जाता है। लोगों की मानें तो इस जल के निरंतर सेवन से व्यक्ति हमेशा निरोगी बना रहेगा।

मंदिर से आती है घंटियों एवं घोड़े के पैरों की आवाज-मंदिर के पुजारी विशाल आनंद भार्गव के अनुसार प्रतिवर्ष शिवरात्रि के मेले में हजारों की संख्या में भक्तगण परिवार सहित यहां दर्शनों के लिए आते हैं। उन्होंने बताया कि कई लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से मंदिर में घंटियां बजने, घोड़ों के पैरों की आवाज सहित मंदिर में आरती की गूंज सुनी है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि यह आवाज कौन करता है? कई धर्मप्रेमी पूरे साल यहां दर्शनों के लिए आते रहते हैं।

सच्चे मन से प्रार्थना करने पर होती है मनोकामना पूरी-केदारेश्वर धाम पर आने वाले धर्मप्रेमियों की मानें तो जो भी कोई भक्तगण यहां आकर सच्चे मन से प्रार्थना करता है उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होती है। इस धाम के प्रति लोगों में अटूट श्रद्धा और भक्ति है।

बेसकीमती जड़ीबूटियों का है भण्डारण-जंगलों में बीचों बीच अपने सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध केदारेश्वर धाम पर जड़ीबूटियों का अपार भण्डारण हैं। यहां के जंगल से चर्म रोग, सफेद दाग सहित अन्य रोगों के उपचार हेतु जड़ी बूटियां उपलब्ध हैं।

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