
9वीं शताब्दी की तकरीबन 1200 साल पुरानी भगवान शांतिनाथ की प्रतिमा का
संरक्षण वज्र लेप से किया जाएगा। जैन मुनि अजित सागर महाराज की प्रेरणा से
शुरु हुए इस संरक्षण कार्य में कर्नाटक के सदलगा से वैज्ञानिक और इंजीनियर
आकर 25 दिन में इस मूर्ति का संरक्षण वज्र लेप से करेंगे। इसके बाद छिद्रों
से घिरी यह नौ गज की मूर्ति आगामी 100 साल के लिए संरक्षित हो जाएगी।
शहर से 14 किमी दूर अतिशय क्षेत्र सेसई में स्थापित भगवान शांतिनाथ की
खड्गासन प्रतिमा नौ गज की है और यह एक मात्र मूर्ति है जो पश्चिममुखी है।
आम तौर पर मूर्तियों का मुख या तो पूर्व की और होता है और या फिर उत्तर की
और मूर्ति का मुख होता पर अति प्राचीन इस जिनालय की मूर्ति सेठ पाडाशाह ने
निर्मित कराई थी। इसका लेख यहां लगे शिलालेखों से ज्ञात होता है। पाषाण
निर्मित इस मूर्ति का इतने वर्षों से लगातार हो रहे जल से अभिषेक के चलते
इस अतिप्राचीन मनोहारी मूर्ति में जगह-जगह छिद्र हो गए हैं जिससे इसके
संरक्षण की सुध यहां की ट्रस्ट कमेटी ने जैन मुनि अजित सागर महाराज की
प्रेरणा से ली है। जिसमें उन्होंने कहा था कि मूर्ति को क्षरण से रोकना है
तो इसका केमिकल ट्रीटमेंट अर्थात वज्र लेप होना अनिवार्य है और समाज को इस
दिशा में कदम आगे बढ़ाना चाहिए और मुनिश्री की इस प्रेरणा पर अब यहां
कर्नाटक के वैज्ञानिक और इंजीनियर संजय सदलगा द्वारा यहां मूर्ति का लेप
प्रारंभ करने की तैयारी शुरु कर दी है यहां 25 दिन में मूर्ति पर लेप के
बाद यह लंबे समय तक संरक्षित हो जाएगी।
बहुत मनोहारी प्रतिमा है
जैन
दर्शन में 16 वे तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ की इतनी मनोहारी प्रतिमा को बहुत
कम देखा जाता है। यह अतिशयकारी प्रतिमा है इसके संरक्षण की बात जब समाज के
लोगों से की, फिर काम शुरू हो गया। मुनि अजित सागर महाराज
मूर्तियां कर चुके हैं संरक्षित
प्रक्रिया में केमिकल एपॉक्सी,क्लियर कट, रीपॉल और एग्रीपॉल जैसे केमिकल
को मिलाकर वज्र लेप की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। हम पहले भी कई
प्राचीन मूर्तियों का वज्र लेप कर उन्हें संरक्षित कर चुके है। संजय सदलगा,
वैज्ञानिक
केमिकल ट्रीटमेंट से ठीक करेंगे प्रभु शांतिनाथ की मूर्ति
मूर्ति के सरंक्षण की पहल केमिकल ट्रीटमेंट के जरिए होगी जिसमें न
केवल लेप द्वारा मूर्ति के छिद्रों को भरने का काम होगा वरन मूर्ति की
सुंदरता भी इससे निखर कर आएगी। पहले केमिकल की पॉलिश होगी फिर मशीनों से
मूर्ति के छिद्रों का भराव होगा इसके बाद लेप की प्रक्रिया शुरु होगी
जिसमें 25 दिन की पूरी प्रक्रिया के बाद यह काम पूरा होगा।






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