
नई दिल्ली। बुराड़ी फांसी कांड को एक जुलाई, 2019 को एक साल पूरा हो जाएगा। एक परिवार के 11 लोगों की आत्महत्या वाला बुराड़ी के संतनगर की गली नंबर 2 का मकान नंबर-137 चर्चा में आ गया है। इस मकान में फिलहाल दो भाई अहमद अली और अफसर किराए पर रहते हैं। कारपेंटर का काम करने वाले दोनों भाइयों की मानें तो शुरुआत में उन्हें लोगों ने डराया कि इतनी मौतों वाले घर में डर लगेगा। वह भूत घर है। पड़ोसियों ने तो उन्हें यहां पर किराये पर नहीं रहने की सलाह दी। लेकिन दोनों भाइयों का कहना है यहां कोई दिक्कत नहीं है। ये चुडावत परिवार के साथ आठ वर्षों से जुड़े रहे थे। दिनेश भाटिया ने उनको यह घर 14 अक्टूबर को सौंपा था। उनके कहने पर दिनेश और उनके परिवार के कुछ लोग भी इस घर में कुछ रातें गुजार चुके हैं।
राजस्थान का था परिवार
बुजुर्ग महिला नारायण दो बेटों भुवनेश व ललित, उनकी पत्नियों, पोते-पोतियों व विधवा बेटी संग रहती थीं। ये लोग राजस्थान के निवासी थे। 22 साल पहले आकर बसे थे। तीसरे बेटे दिनेश सिविल कांट्रेक्टर हैं और राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में रहते हैं। दोनों बेटों की एक परचून व दूसरी प्लाईवुड की दुकान है। पहली व दूसरी मंजिल पर परिवार रहता था।
घटना का ऐसे पता चला
दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त तारा प्रसाद शर्मा के साथ मार्निंग वॉक पर जाते थे। उससे पहले शर्मा ललित की दुकान से दूध लेते थे। 1 जुलाई की सुबह दुकान नहीं खुली तो शर्मा दरवाजा खटखटाने गए। दरवाजा खुला था। वह ऊपर चले गए। ऊपर का दरवाजा भी खुला था। आगे जाने पर देखा कि बरामदे वाले हिस्से में दस लोगों के शव लटके थे, जबकि एक महिला का शव कमरे में पड़ा था।
11 लोगों ने की थी आत्महत्या
मृतकों की पहचान नारायण देवी (77), उनकी बेटी प्रतिभा (57) और दो बेटे भावनेश (50) और ललित भाटिया (45) के रूप में हुई है। भावनेश की पत्नी सविता (48) और उनके तीन बच्चे मीनू (23), निधि (25) और ध्रुव (15), ललित भाटिया की पत्नी टीना (42) और उनका 15 वर्ष का बेटा शिवम , प्रतिभा की बेटी प्रियंका (33) भी मृत मिले थे। इनमें प्रियंका की जून महीने ही सगाई हुई थी और दिसंबर, 2018 में उसकी शादी होनी थी।



