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11 लाख के सिंहासन पर विराजेंगी मां भवानी, डेढ़ करोड़ के सोने से बनेगा गर्भगृह,


भोपाल ।राजधानी के सोमवारा स्थित प्रसिद्ध मां भवानी मंदिर (कर्फ्यू वाली माता) को जल्द ही भव्य रूप प्रदान किया जाएगा। मंदिर में मां भवानी अब 11 लाख रुपए की लागत से तैयार हो रहे सिंहासन पर विराजमान होंगी। मार्च में नवरात्र के पहले दिन मां को इस सिंहासन पर विराजमान कराया जाएगा। तांबे के इस सिंहासन का फिलहाल निर्माण किया जा रहा है। इस पर गणेश चतुर्थी तक सोने की मोटी परत चढ़ाई जाएगी।इसके साथ ही करीब 4 किलो सोने से मंदिर का गर्भगृह भी तैयार किया जाएगा। इसकी लागत करीब डेढ़ करोड़ रुपए तक पहुंचने की संभावना है। मंदिर में चांदी की जलहरी भी बनाई जाएगी, शिवपिंडी पर भी सोने का मुखौटा होगा।

सोने के दान के लिए रखा दानपात्र
श्री मां भवानी मंदिर समिति के अध्यक्ष रमेश सैनी ने बताया कि माता के दरबार पर पूरी तरह से सोने-चांदी की परत चढ़ाने पर विचार चल रहा है। इसके लिए मंदिर में रखे दानपात्र पर लिखकर सोना दान करने की अपील श्रद्धालुओं से की गई है। दान पात्र पर स्पष्ट लिखा गया है कि स्वर्ण मंदिर के निर्माण में सहयोग करने के लिए सोने का दान करें। उन्होंने बताया कि पहले भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उम्मीद से अधिक सोने का चढ़ावा चढ़ाया था। जिससे भगवान के मुकुट, कलश एवं दरवाजे समेत अन्य काम पूर्व में ही कराए जा चुके हैं।
मंदिर में हीरे-जवाहरात जड़े 8 मुकुट
मां भवानी मंदिर पहले से ही बेहद भव्य है। मंदिर में सोने का मुकुट, चांदी के दरवाजे एवं 8 हीरे-जवाहरात जड़े स्वर्ण मुकुट हैं। करीब 10 साल पहले शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा सोने का श्रीयंत्र भी इस मंदिर में स्थापित किया गया है। मंदिर में रखवाली के लिए रातभर गार्ड तैनात रहते हैं। इसके साथ ही पूरा मंदिर सीसीटीवी कैमरों से लैस है। मां भवानी मंदिर में प्रतिदिन हजारों रुपए का चढ़ावा आता है जिसे मंदिर के बैंक खाते में जमा किया जाता है। मंदिर समिति द्वारा शासन के सभी प्रकार के टैक्स भी अदा किए जाते हैं, साथ ही चढ़ावे की रकम का समय-समय पर ऑडिट भी किया जाता है।
इसलिए पड़ा कर्फ्यू वाली माता नाम
मंदिर की स्थापना को लेकर इस क्षेत्र में कर्फ्यू लगाना पड़ा था, इसलिए मंदिर का नाम कर्फ्यू वाली माता पड़ा। 80 के दशक में मंदिर निर्माण से पहले यहां नवरात्र के दौरान झांकी लगा करती थी। अब मंदिर में हुए विभिन्न निर्माणों एवं उसकी भव्यता के लिए 5 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
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