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10 बैठकें, 15 हिदायत, फिर भी 80 फीसदी स्कूल बसों में नहीं लगे स्पीड गवर्नर,


भोपाल। कोई बड़ा हादसा होने के बाद ही जिला प्रशासन की नींद खुलती है। इंदौर में हुए बस हादसे में स्कूली छात्रों की जान जाने के बाद अधिकारियों ने फिर से बसों की फिटनेस को लेकर मुहिम चलाने की बात कही है।जबकि, हकीकत यह है कि दो साल में दर्जन भर बैठकें और हिदायतें देने के बाद भी हालात जस के तस हैं। अब तक शहर के स्कूल-कॉलेजों में खटारा बसें दौड़ रही हैं। वैन भी एलपीजी से चल रहे हैं। लेकिन महीनों से इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने बसों में जीपीएस, कैमरे और स्पीड गवर्नर लगाने के लिए मुहिम चलाई थी। चौंकाने वाला तथ्य यह है कि पिछले छह महीने से कलेक्ट्रेट कार्यालय से इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।नतीजा यह है कि 2 साल में 10 से अधिक बैठकें और 15 से अधिक बार हिदायत देने के बाद भी 80 फीसदी स्कूल और कालेज बसों में न जीपीएस लगे और ना स्पीड गवर्नर। कैमरे तो दूर की बात है। इधर, आरटीओ कार्यालय से भी 6 माह से बसों की जांच नहीं की गई है। इस कारण स्कूल बसें खुलेआम बिना फिटनेस की सड़कों पर दौड़ रही हैं।
ऐसे पल्ला झाड़ते हैं स्कूल
शहर के स्कूल अपनी खटारा बसों के संबंध में यह तर्क देने से भी नहीं चूकते हैं कि उनका स्कूल बसों का संचालन नहीं करता बल्कि अभिभावक यह तय करते हैं कि उनका बच्चा कैसे स्कूल आए। यह निजी बस ऑपरेटर संचालित करते हैं। स्कूल की बस नहीं है। ज्ञात रहे कि कई बार शहर में हुए बस हादसों में बच्चों की जान भी जा चुकी है।
पहुंचने की जल्दी
कई स्कूलों में अटैच बसें, अन्य शिक्षण संस्थानों से भी अटैच रहती हैं। इस कारण पहुंचने की जल्दी में कई बार हादसे हो जाते हैं। हाल में एनआरआई ग्लोबल स्कूल में अभिभावकों ने यह आरोप लगाया था कि बस का स्टेयरिंग फेल हो गया था, जिसे स्कूल प्रशासन ने नकार दिया था।
इधर, इंदौर में हुए हादसे पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दुख जताया है वहीं गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने हादसे की जांच के आदेश दिए हैं। इधर, भोपाल में मार्च 2015 में हुए बस हादसे से सबक लेकर स्कूलों बसों में शुरू की जीपीएस और स्पीड गवर्नर लगाने की मुहिम को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
मात्र 12 प्रतिशत स्कूलों ने ही दी जानकारी
स्कूल बसों की मॉनीटरिंग के लिए एडीएम के निर्देशन पर जागरूक भोपाल पोर्टल बनवाया गया था। इसमें अभी 606 स्कूल रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से मात्र 72 स्कूलों ने ही जानकारी दर्ज कराई है वह अधी-अधूरी। जबकि राजधानी के सभी स्कूलों को आईडी पासवर्ड उपलब्ध कराए गए हैं।स्कूल संचालकों को बसों, कक्षा में चलाई जा रहीं किताबें, बसों की फिटनेस, उनके ड्रायवर आदि दर्ज की जानकारी इस पोर्टल पर दर्ज करनी है। बता दें कि 577 स्कूल संचालकों को जिला प्रशासन व जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से जून माह के पहले सप्ताह में नोटिस थमाए गए थे। इनमें से मात्र 3 प्रतिशत स्कूलों को छोड़कर अन्य किसी भी स्कूल ने जवाब न तो जिला शिक्षा अधिकारी को पेश किया और न ही जिला प्रशासन को।
पोर्टल पर दर्ज कर दी अधूरी जानकारी
– किसी स्कूल ने बसों के नंबर तो दर्ज किए, लेकिन उनकी फिटनेस व ड्रायवर की जानकारी अपलोड नहीं की।
– किसी ने बस और ड्रेस तो किसी ने केवल यूनिफार्म पोर्टल पर दर्ज नहीं की।
– कोर्स की सूची तो डाली गई, लेकिन किस प्रकाशक व किन किन दुकानों से यह खरीदी जा सकती है, उसकी सूची नहीं डाली।
– स्कूल से अटैच बस की जानकारी पोर्टल पर दर्ज की गई। मैजिक व अन्य वाहन जिनसे बच्चे घर आते-जाते हैं, उनकी सूची नहीं है।
एक नजर इधर भी
जागरूक भोपाल पोर्टल से जोड़े गए स्कूल- 606
पोर्टल पर स्कूलों की जानकारी अपलोड- 72
पोर्टल नहीं देखने वाले स्कूल- 534
स्कूलों को थमाए गए थे नोटिस- 577
साढ़े चार माह में स्कूलों ने जानकारी की अपलोड- 12 प्रतिशत
स्कूलों को यह जानकारी करनी है अपलोड
– कोर्स, पुस्तकों की कीमत और बुक स्टोर जहां पुस्तकें मिल सकेंगी।
– यूनिफॉर्म कौन सी। यूनिफॉर्म देने वाले वेंडर्स।
– बसों के नंबर, उनकी फिटनेस, जीपीएस, उनके रूट, बस के ड्रायवर-कंडक्टर की जानकारी।
– ड्रायवर-कंडक्टरकी कंपलीट जानकारी। डेढ सौ
यह थी व्यवहारिक दिक्कत
भोपाल जागरूक पोर्टल पर स्कूल बसों की एंट्री के लिए स्कूल एवं कॉलेज बस ऑनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि हमारे ड्रायवर कम पढ़े लिखे हैं। उन्हें पोर्टल पोर्टल पर जानकारी दर्ज करने में परेशानी होगी। स्कूल संचालकों को भी पोर्टल पर जानकारी कैसे दर्ज करनी है इसके लिए कलेक्टर कार्यालय में हेल्प डेस्क खोली जाए। डेस्क की सहायता से ड्रायवरों की समस्याएं दूर हो सकेंगी।
प्रशासन जवाबदारी
– सभी स्कूल बसों में जीपीएस, कमैरे और स्पीड गर्वनर लगें।
– धारा-144 लगाकर स्कूल बस संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने की
– उल्लंघन करने के चलते धारा-188 के तहत कार्रवाई करने की
नतीजाः सिफर
स्कूल की जवाबदारी
– सभी बसों में जीपीएस लगवाने की
– बस में एक महिला अटेंडर उपलब्ध कराने की
– घर तक बच्चा सकुशल पहुंच जाए इसकी ट्रेकिंग
यह है हकीकत
– राजधानी 25 सौ बसें
– जीपीएस लगा है 700 में
– 1200 बसों में नहीं लगा जीपीएस
– मेंटेनेंस को लेकर अभिभावक रहते हैं नाराज।
नतीजाः कुछ भी नहीं हो पाया
जिला प्रशासन अब तक क्या किया
तत्कालीन कलेक्टर निशांत वरवड़े ने निर्देश जारी किए थे कि कलेक्टर ने आरटीओ को दिए निर्देश थे कि सुप्रीमकोर्ट की गाइडलाइन का पालन कराएं। 2010 से इसका पालन कराने का दावा किया जा रहा है। कलेक्टर ने कहा है कि बसों में डबल-डोर, अग्निशमन यंत्र, गाड़ियों का रंग पीला हो। गाड़ियों के पीछे इमरजेंसी नंबर लिखे जाए। ताकि घटना के समय संपर्क किया जा सके। इसके अलावा एडीएम दिशा नागवंशी ने स्कूल बसों की जांच के लिए छह टीमें गठित कर दी थी।हम फिर से भोपाल जागरूक पोर्टल में जानकारी अपलोड न करने वाले स्कूल संचालकों को नोटिस जारी करेंगे। इस बार सख्ती से कार्रवाई की जाएगी। इस बार तो अभिभावकों को भी समझाइश दी जाएगी। – दिशा नागवंशी, एडीएम हेडक्वाटर, भोपाल
-आरटीओ की क्या थी जिम्मेदारी, अब तक किया क्या
स्कूल बसों को फिटनेस सार्टिफिकेट देने से पहले परिवहन विभाग ने 34 बिन्दुओं की जांच सूची है। जिसमें फिटनेस कराने आने वाली बस व अन्य वाहनों का पंजीयन चिन्ह नियमानुसार अंकित होना चाहिए। फर्स्ट एंड बॉक्स, पीयूसी, बीमा, स्कूल बसों का पीला रंग, हॉर्न चालू होना चाहिए।कुल 34 बिन्दुओं की जांच करने के बाद ही फिटनेस सार्टिफिकेट जारी करने की जिम्मेदारी है। साथ ही स्पीड गर्वनर, सीसीटीवी, जीपीएस लगाना परमिट शर्तों में रखा है। इसके बाद ही बसों के फिटनेस सार्टिफेकेट जारी किए जाते हैं।
छह महीनों से आरटीओ नहीं की चेकिंग
बड़ी स्तर पर आरटीओ पिछले छह महीनों से बसों की चेकिंग नहीं की। स्कूल बस संचालकों ने आरटीओ से सांठगांठ करके नियमों को दरकिनार करते हुए फिटनेस सार्टिफिकेट ले लेते हैं। कई बार बिना फिटनेस के भी बसों को दौड़ाते रहते हैं। यदि स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी, जीपीएस लगा नहीं मिलता है है तो 500-500 रुपए जुर्माना लगाने का प्रावधान है। साथ ही परमिट शर्तों का उल्घंघन करने पर संबंधित स्कूल बसों की फिटनेस भी निरस्त की जाती है।
दिए हैं आरटीओ के चेकिंग करने के निर्देश
अभी हाल ही में आदेश जारी कर सभी आरटीओ को नियमों का पालन किए दौड़ रहीं स्कूल बसों व अन्य वाहनों पर कार्रवाई के लिए चेकिंग करने के निर्देश दिए हैं। साल 2018 में बसों में स्पीड गवर्नर, जीपीएस, सीसीटीवी लगवाना प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा है। पालन नहीं करने वाले बस संचालकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश हैं। – डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव, परिवहन आयुक्त
करते हैं परमिट शर्तों का पालन
शहर में संचालित स्कूल बसों में स्पीड गवर्नर, सीसीटीवी, जीपीएस परमिट शर्तों में है, जिसका पालन सभी बस संचालक कर रहे हैं। इंदौर का हादसा कैसे हुआ, वो जांच का विषय है। –सुनील दुबे, सचिव, स्कूल बस ऑनर्स एसोसिएशन
बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर नहीं शासन-प्रशासन
शासन-प्रशासन गंभीर नहीं है। पिछले तीन सालों से सीसीटीवी, जीपीएस, स्पीड गवर्नर लगाने के लिए ज्ञापन दे रहे हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। जिन मार्गों पर ट्रक चल रहे हैं, वहां से स्कूल बसें नहीं भेजनी चाहिए। इससे हादसे कम होंगे। – कमल विश्वकर्मा, अध्यक्ष पालक महासंघ मप्र
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