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10 साल में 100 ने मांगी आंखें, नेत्रदान सिर्फ एक

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कोरबा। पिछले दस साल में फिर से दुनिया देखने की आस
लिए 100 से ज्यादा दृष्टिविहीन लोगों ने आंखें पाने अर्जी लगाई है।
स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड के अनुसार आवेदन के विपरीत इन दस साल में मात्र
एक दानदाता ने नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कर किसी जरूरतमंद के आंखों की
खोई रोशनी लौटाई।
हर साल शिविरों में कई लोग नेत्रदान का संकल्प लेकर
आगे आते हैं, लेकिन जब आंखें सुरक्षित करने का वक्त आता है, ऑपरेशन के लिए
संसाधनों की कमी आड़े आ जाती है। जरूरी उपकरणों की व्यवस्था नहीं होने के
कारण लोगों का संकल्प और फिर से देख पाने लोगों की उम्मीद अधूरी रह जाती
है।
ऐसे लोगों की कमी नहीं, जिनकी दुनिया में एक अरसे से सिर्फ और
सिर्फ अंधेरा है। दृष्टिविहीन होने का दंश झेल रहे ऐसे जरूरतमंद लोगों की
आंखें लौटाकर जीवन में फिर से खुशियों के रंग भरने की जरूरत है। इस
उद्देश्य को लेकर हर साल नेत्रदान शिविर लगाए जाते हैं और लोगों को
नेत्रदान करने प्रोत्साहित भी किया जाता है।
बावजूद इसके जिला
स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड पर गौर करें, तो नेत्रदान करने वालों की लिस्ट
में मात्र एक नाम ही दिखाई देता है। दूसरी ओर दान की आंखें मांगने वालों की
संख्या 100 पार कर चुकी है। ऐसा नहीं है कि अपेक्षा के अनुरूप लोगों में
नेत्रदान के प्रति रूझान नहीं है।
हर साल कई जागरूक नागरिकों ने
स्वयं से आगे आकर नेत्रदान की रूचि जाहिर की है। उन्होंने संकल्प भी लिया
है कि मृत्यु के पश्चात्‌ उनकी आंखें किसी जरूरतमंद की जिंदगी रोशन करने
दान की जाए। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग में जिला स्तर पर संसाधनों की कमी
के चलते ऐसे दानदाताओं का संकल्प पूरा नहीं हो पाता।
जानकारी जुटाते गुजर गए थे 6 घंटे
नेत्रदान
मृत्यु के बाद होता है और मृत्यु के 6 घंटे के भीतर नेत्रदान हो जाना
चाहिए, पर तय वक्त में ऑपरेशन कर नेत्र सुरक्षित करने जिले में जरूरी
उपकरणों की सुविधा नहीं है, जिसकी वजह से तय वक्त में प्रक्रिया पूरी नहीं
हो पाती।
कुछ ऐसी ही समस्या करीब एक माह पहले ट्रांसपोर्ट नगर
मुख्यमार्ग में संचालित मामाजी बेकर्स के संचालक व स्वयंसेवी प्रेम मदान के
समक्ष पेश आई थी। उनके एक रिश्तेदार का नेत्रदान कर सुरक्षित करने
स्वास्थ्य विभाग को सूचित किया, लेकिन जरूरी उपकरणों की व्यवस्था नहीं हो
सकी और जानकारी जुटाते ही 6 घंटे गुजर गए।
घर जाकर निःशुल्क करते हैं सुरक्षित
नेत्रदान
करने वालों की प्रक्रिया पूरी करने चिकित्सक स्वयं घर जाकर ऑपरेट करते हैं
और निःशुल्क प्रक्रिया पूरी कर आंखें सुरक्षित करते हैं। इच्छुक व्यक्ति
नेत्रदान के लिए नजदीकी नेत्रबैंक, मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल में
संपर्क कर सकते हैं।
नेत्र ऑपरेशन के बाद चश्मा पहनने वाले व्यक्ति
पर अगर चाहें तो नेत्रदान कर समाज में योगदान दे सकते हैं। यदि किसी
व्यक्ति ने अपने जीवन में नेत्रदान की घोषणा नहीं भी की है, तो भी उनके
रिश्तेदार मृत व्यक्ति का नेत्रदान कर सकते हैं। बावजूद इसके कई बार यह
सुनने मिलता है कि दानदाता भटकने मजबूर हो रहे।
नेत्रदान कर इन्होंने बांटी खुशियां
वर्ष
2007 में एमपी नगर निवासी अरूण शर्मा व श्रीमती रश्मि शर्मा ने अपने 19
वर्षीय पुत्र आकाश शर्मा की आंखे दान की थी। दुर्घटना में मृत्यु की ऐसी
दुखद घड़ी में भी किसी और के जीवन में खुशियां लौटाने की सोच इस परिवार ने
अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया। पर नेत्रदान की जानकारी विभाग को नहीं दी गई
थी।
तीन साल पहले भावनानी परिवार के एक सदस्य ने नेत्रदान कर ईश्वर
के इस अनमोल उपहार का दान किया। इनका कहना है कि इस एक फैसले से किसी की
जिंदगी में वर्षों का अंधेरा दूर हो सकता है, उसकी दुनिया में खुशियों की
रोशनी लौटाई जा सकती है।
स्वास्थ्य विभाग का पखवाड़ा 8 तक
लोगों
को जागरूक करने राष्ट्रीय दृष्टिविहीनता नियंत्रण कार्यक्रम चलाया जा रहा
है। इसके तहत राज्य शासन के निर्देश पर जिला स्वास्थ्य विभाग 25 अगस्त से 8
सितंबर के बीच नेत्रदान पखवाड़े का आयोजन कर रहा है। लोगों के हित के लिए
शासन-प्रशासन से नेत्रदान करने का आग्रह लोगों से किया है।
केवल ऐसे
व्यक्ति जो मृत्यु से पूर्व एड्स, पीलिया, कर्क रोग (ब्लड कैंसर), रेबीज,
सेप्टीसिमिया, टिटनेस, हेपेटायटिस तथा सर्पदंश से पीड़ित रहा हो, तो उन्हें
नेत्रदान के लिए अयोग्य समझा जाता है, लेकिन मधुमेह यानि डाइबिटीज के मरीज
भी नेत्रदान कर सकते हैं।
– पिछले दस साल में 100 से ज्यादा
दृष्टिविहीन लोगों ने आंखों की जरूरत बताते हुए आवेदन प्रस्तुत किया है,
जिसके विपरीत रिकार्ड के अनुसार अब तक मात्र एक ने ही नेत्रदान किया है।
लोगों को नेत्रदान के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए ही यह पखवाड़ा मनाया जा
रहा है और मेरा यही आग्रह है कि जरूरतमंद लोगों के जीवन से अंधेरा दूर
करने ज्यादा से ज्यादा लोग आगे आकर संकल्प लें। –
डॉ. केएल ध्रुव, प्रभारी नेत्ररोग विभाग, जिला अस्पताल

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