जान जोखिम में डालकर, ट्यूब के सहारे तेरहवीं में शामिल हुए रिश्तेदार

शिवपुरी। सुल्तानगढ़ में हुई नौ मौतों के बाद भी प्रशासन एवं पुलिस द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम देखने को नहीं मिल रहे हैं। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के तमाम दावों की पोल खोलते बिजरौनी गांव की तस्वीर सबके सामने आई है। बरसात से गांव इन दिनों टापू में तब्दील हो गया है। सिंध नदी में उफान आ जाने से खतौरा-बिजरौनी व बदरवास से बिजरौनी जाने वाले रास्ते पर रपटा चढ़ गया है जिससे आवागमन ठप हो गया। गांव पहुंचने के दोनों रास्तों पर बने रपटों पर पानी इतना अधिक भरा हुआ है कि इनसे निकला मुश्किल है और जोरदार बारिश से गांव में चारों ओर पानी भर गया है। मजबूरी में ट्यूब के सहारे लोग गांव में पहुंच रहे हैं। गांव के युवक खुद तैरकर लोगों की मदद कर रहे हैं। कल गांव में हरिओम धाकड़ के यहां तेरहवीं का कार्यक्रम था जिसमें गुना से शामिल होने के लिए रिश्तेदार आए हुए थे, लेकिन रास्ता बंद होने के कारण मजबूरी में रिश्तेदारों ने अपनी जान जोखिम में डालकर टयूब के सहारे बिजरौनी पहुंचना पड़ा। गांव के तैराक युवक एक ट्यूब पर दो लोगों को पार कराते हैं। रिश्तेदारों के साथ आया एक युवक इस दौरान पानी में बह भी गया था, लेकिन तैराक युवकों ने तुरंत पानी में कूदकर उसे बचा लिया। यहां बता दें कि सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं है। 

जानें कौन हैं गांव के असली हीरो

लाइफ जैकिट सहित अन्य आधुनिक संसाधनों के बिना ही गांव के रहने वाले बिरजू किरार, हरकोला किरार, राजा भैया, कल्लू व देवेंद्र ने पानी के तेज बहाव में तैरकर ट्यूब के सहारे लोगों को रपटा पार कराया।

इनका कहना है

बिजरौनी में हरिओम के यहां जा रहे थे उसकी मां की तेरहवीं थी ट्यूब द्वारा रपटा को पार किया। 
नरेश, रिश्तेदार