
करैरा। न्यायालय में लंबित सिविल, फौजदारी, विद्युत,
परिवार सहित अन्य समझौतयुक्त मामलों का निराकरण कराए जाने के लिए राष्ट्रीय
विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण
जबलपुर के निर्देशन में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया। इसमें
न्यायालय में लंबित पड़े प्रकरणों का आपस में समझौता कराकर निराकरण कराया।
वहीं कुटुम्ब न्यायालय में दूर रह रहे पति-पत्नी के बीच समझाइश देकर सुलह
कराई। सुलह के बाद पति-पत्नी को वरमाला पहनवाकर आगे के दांपत्य जीवन को
सुखमय बिताने की शपथ दिलाई गई।
न्यायालय परिसर करैरा में आयोजित की
नेशनल लोक अदालत में तहसील विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष व अपर जिला
न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण किया और
महात्मा गांधी को नमन कर लोक अदालत का शुभारंभ कराया। वहीं सामाजिक
कार्यकर्ता घनश्याम योगी ने सरस्वती वंदना का गायन किया। नेशलन लोक अदालत
के लिए न्यायालय में कुल 6 खंडपीठ गठित किए गए। इसमें 4 खंडपीठ व्यवहार
न्यायाधीश न्यायालय की तथा 2 खंडपीठ अपर जिला न्यायालय की गठित की गई। उक्त
खंडपीठ में कुल 378 प्रकरण रखे गए। इसमें से 156 प्रकरणों का निराकरण हुआ।
विद्युत के प्रकरणों के लिए अलग से खंडपीठ गठित किया गया। इसमें विशेष
न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने प्रकरणों का निराकरण कराकर 24 लाख 51 हजार रुपये
के राजस्व राशि की वसूली की। इनके अलावा शैलजा गुप्ता, ज्ञानेंद्र कुमार
शुक्ला, विपेंद्र सिंह यादव, मोहित श्रीवास्तव, दयाल सिंह सूर्यवंशी की
खंडपीठ में प्रकरणों का निराकरण किया गया। इस अवसर पर बार एसोसिएशन के
वरिष्ठ अभिभाषक पीडी गुप्ता, अशोक जैन, अतुल भार्गव, अभिषेक गुप्ता, पूर्व
पार्षद आरिफ खान सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
समझौते से फिर हरी हुई दांपत्य जीवन की बेल
नेशनल
लोक अदलत में अपने प्रकरण की सुनवाई के लिए पहुंचे ग्राम अमोल निवासी
ब्रजेश वाल्मीकि एवं ग्राम नया खेड़ा निवासी कल्पना (परिवर्तित नाम) का
विवाह वर्ष 2016 में धूमधाम से संपन्ना हुआ था, परंतु बेटी के पैदा होने के
बाद से पति-पत्नी के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए एवं उक्त मामला न्यायालय
तक पहुंच गया। न्यायधीश अतुल सक्सेना द्वारा पति बृजेश बाल्मीकि की
काउंसलिंग की गई एवं दांपत्य संबंध के महत्व से उसे अवगत करा कर पुत्री के
जन्म को लक्ष्मी आने के स्वरूप रखकर लगातार समझौते का प्रयास किया गया।
अंत में न्यायाधीश के समझाइस पर बृजेश ने प्रकरण न्यायालय में वापस लेकर
पत्नी एवं बच्चों के साथ मधुर संबंध रखकर जीवन व्यतीत किए जाने का आश्वासन
दिया।




