
काबुल। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट (आईएस) जैसे आतंकी संगठन के साथ मिलकर काम कर रहा है। दोनों संगठनों ने अफगानिस्तान में मौजूद भारत और अमेरिका के संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने का प्लान किया है। इसके लिए बतौर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तानी आर्मी का भी सहयोग लेने की बात हो चुकी है। इसके लिये इन संगठनों ने बैठक भी कर ली है, जिसमे पाकिस्तान के खुफिया एजेंसी और आर्मी के आला अधिकारी भी शामिल हुए थे। उक्त बैठक कुनार प्रांत में डांगम जिले के जाबा इलाके में हुई है। यह बात खुफिया अधिकारियों के साथ नई दिल्ली और वाशिंगटन के राजनयिकों ने बताई है।
रिपोर्ट के अनुसार, लश्कर के
कमांडरों को पाकिस्तान से भेजे गए आत्मघाती हमलावरों सहित विभिन्न प्रकार के हमलों को अंजाम देने का काम सौंपा गया है। यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब पाकिस्तान लश्कर, जमात-उद-दावा (जेयूडी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे अन्य समूहों पर नकेल कसने के लिए अमेरिका और वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के लगातार दबाव में है। लश्कर के संस्थापक हाफिज सईद को हाल ही में आतंकी फंडिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया है।
यह जानकारी पेंटागन और संयुक्त राष्ट्र के पैनल द्वारा अफगानिस्तान में सैकड़ों लश्कर कैडरों की उपस्थिति को लेकर आई रिपोर्ट से मेल खाती है। पेंटागन की रिपोर्ट में लश्कर के गुर्गों की संख्या 300 बताई गई है, जबकि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि अकेले 500 लड़ाके कुनार और ननगरहार प्रांतों में सक्रिय हैं।



