शिवपुरी। प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के तहत आदिवासी हितग्राहियों के आवास निर्माण और मनरेगा मजदूरी की राशि में कथित अनियमितता एवं गबन के मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपी जीवन सिंह यादव को दोषमुक्त कर दिया है। विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, शिवपुरी ने विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक SC/24/2026 में 31 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया। आरोपी की ओर से अधिवक्ता करण कटारिया ने पैरवी की।
प्रकरण ग्राम पंचायत गताझलकुई में प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी शिकायत के बाद सामने आया था। जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मोंगराज मीणा द्वारा की गई शिकायत में तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव जीवन सिंह यादव पर 125 आदिवासी हितग्राहियों के आवास निर्माण में अनियमितता करने के आरोप लगाए गए थे।
शिकायत के अनुसार, हितग्राहियों से आवास निर्माण का कार्य कराने के बावजूद उनके आवास पूर्ण नहीं कराए गए। साथ ही पूर्व से लाभान्वित और अपात्र व्यक्तियों को योजना का लाभ देने तथा करीब 70 लाख 38 हजार रुपये की राशि में हेराफेरी करने का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा मनरेगा की लगभग 7 लाख 25 हजार 628 रुपये की मजदूरी राशि अपात्र व्यक्तियों के खातों में अंतरित कराने की बात भी शिकायत में कही गई थी।
मामले में प्रारंभिक विभागीय जांच के लिए दल गठित किया गया था। जांच में हितग्राहियों के आवासों की स्थिति, पोर्टल पर दर्ज जानकारी, भुगतान और मनरेगा मजदूरी से संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया गया। जांच प्रतिवेदन के आधार पर पुलिस को शिकायत दी गई, जिसके बाद थाना बामौरकलां में अपराध क्रमांक 112/2025 दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। पुलिस ने अधिकारियों, जांचकर्ताओं, हितग्राहियों और अन्य साक्षियों के बयान दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया था।
न्यायालय में आरोप साबित नहीं कर सका अभियोजन
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने विभागीय जांच प्रतिवेदन, जांच दल के सदस्यों, विवेचना अधिकारियों और हितग्राही साक्षियों के बयानों का परीक्षण किया। विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपी और हितग्राहियों के बीच आवास निर्माण का कोई लिखित अनुबंध प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके अलावा ऐसा कोई ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्य भी सामने नहीं आया, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि कथित राशि आरोपी को सौंपी गई थी या उसने उसका बेईमानीपूर्वक गबन अथवा दुरुपयोग किया था।
न्यायालय ने यह भी पाया कि कथित गबन की राशि की कोई बरामदगी नहीं हुई और न ही विवेचना में ऐसा महत्वपूर्ण साक्ष्य मिला, जिससे आरोपी की आपराधिक संलिप्तता संदेह से परे साबित हो सके।
अंततः विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, शिवपुरी ने 31 अक्टूबर 2026 को पारित निर्णय में अभियोजन द्वारा आरोप प्रमाणित नहीं कर पाने के आधार पर जीवन सिंह यादव को भारतीय न्याय संहिता की धारा 316(5) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(a) के आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। आरोपी की ओर से अधिवक्ता करण कटारिया ने न्यायालय में पैरवी की।
प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना में 70 लाख से अधिक के कथित गबन मामले में जीवन सिंह यादव दोषमुक्त, विशेष न्यायालय ने सुनाया फैसला / Shivpuri News



