शिवपुरी। जिले के पोहरी महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका भर्ती प्रक्रिया को लेकर भारी भ्रष्टाचार और धांधली का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां फर्जी अंकसूचियों के दम पर नौकरियां बांटने और 50 हजार रुपये के अवैध लेनदेन के गंभीर आरोपों के बीच एक आवेदिका ने कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचकर पूरे भर्ती रैकेट की पोल खोल दी है और स्वतंत्र जांच की मांग की है।
पीड़ित आवेदिका मधुरी आदिवासी ने आरोप लगाया है कि पोहरी परियोजना में पदस्थ भृत्य दौलत बाथम फर्जी अंकसूची तैयार कराने से लेकर भर्ती में ‘सेटिंग’ कराने का मुख्य सरगना है, जिसके संबंध में एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई है। मामले का सबसे खतरनाक पहलू परियोजना अधिकारी (CDPO) के कथित प्राइवेट ड्राइवर अरविंद जाटव से जुड़ा है, जिसके फोन-पे खाते में सितंबर माह में 50 हजार रुपये के संदिग्ध लेनदेन का बड़ा दावा किया गया है, जो इस पूरे भ्रष्टाचार की ओर स्पष्ट इशारा करता है।
शिकायत के अनुसार, रामपुरा आदिवासी बस्ती से आवेदन करने वाली मधुरी आदिवासी जब पहली पायदान पर मौजूद अभ्यर्थी की अंकसूची फर्जी पाए जाने के बाद सूची में शीर्ष पर आईं, तो विभाग ने मामूली तकनीकी बहाना (अंकसूची पर सील-हस्ताक्षर न होने का दावा) बनाकर उनका हक छीन लिया और चहेती तीसरी नंबर की अभ्यर्थी को चुपचाप नौकरी पर बैठा दिया। विरोध करने पर उनके पति के साथ अभद्रता और मोबाइल छीनने जैसी गुंडागर्दी भी की गई। जब पूर्व में भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई हो चुकी है, तो पोहरी परियोजना में इस काले खेल की उच्चस्तरीय जांच से क्यों मुंह मोड़ा जा रहा है?
इनका कहना हैं
मामले को दिखावा लेते है जांच करवाकर उचित कार्यवाही करेंगें
नीरज गुर्जर (सीडीपीओ, पोहरी)
मामला संज्ञान में लाया गया है ड्राइवर तो प्राइवेट है ओर मामले की जांच करवाकर उचित कार्यवाही करेंगें
धीरेन्द्र जादौन (जिला कार्यक्रम अधिकारी, शिवपुरी)





