
शिवपुरी। करैरा विधानसभा के 32 गांव पिछले 23 सालो से करैरा अभयारण का दंश झेल रहें। इस प्रतिबन्ध के लगे होने से इन ग्रामो के किसान अपनी जमीन के मालिकाना हकदार होने के बाद भी जरूरत पडऩे पर न जमीन खरीद सकते है और ही नही बेच सकते है । हर बार के विधानसभा के चुनावो में यह मुद्दा काफी तूल पकड़ता है लेकिन हर बार नेताओ द्वारा केवल दिलाशा दी जाती है और कोई करता कुछ नही, अभी 11 नवम्बर को भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में सभा को संबोधित करने आए शिवराज सिंह ने मंच से लोंगो से कहा? हमने अभी डी नोटिफिकेशन जारी करा दिया है इस क्षेत्र में न सोन है न चिडिय़ा आने वाले समय मे यह भी खत्म हो जाएगी यही वह मुद्दा है करैरा विधानसभा का जो भाजपा कांग्रेस के प्रत्याशी के जीत हार का भाग्य तय करता है । लेकिन इन 23 सालो में एक भी विधायक करैरा अभयारण्य को समाप्त नहीं करा सका चुनाव जीत जाने के बाद इन सभी विधायकों ने कभी 32 गांव के विकास के बारे में भी कुछ भी नही सोचा जिसके चलते आज यह गांव विकास से कोसो दूर बने है।
402 वर्ग किलो मीटर में बसा अभ्यारण
करैरा अभ्यारण की सीमा ग्राम लंगूरी से लगती है जो 402 वर्ग किलो मीटर के क्षेत्रफल में बसा हुआ है जिसमे अभ्यारण की स्वयं की कोई जमीन नही है ज्यादातर जमीन किसानो की एवं कुछ रेवेन्यू की है। इन 32 गांव में रावत और जाटव बघेल समाज की संख्या ज्यादा है लगभग 80 हजार वोटर है। उक्त आशय की जानकारी देते हुए राजेन्द्र रावत, वनमाली रावत, हरनायरण पांडेय, पंजाव रावत, जगदीश रावत सहित कई किसानो को इस अभ्यारण के खत्म न होने से कई परेशानियो का सामना करना पड़ रहा है।
रेत के बने है जगह जगह घाट
करैरा अभ्यारण में दो दर्जन से ज्यादा रेत के घाट बने हुए है जैसे कल्याणपुर, सिलरा, अंदौरा, दिहायला, सुनारी, भासडा खुर्द, रौनीजा नेकौरा, जरगवा सानी, राय पहाड़ी, बरसौड़ी, लमकना, फतेहपुर, खड़ीचा, बहगवा, धमधौली आदि कई गांव हैं जहां पर रेत की खदानें हैं और इन खदानों को अवैध रूप से काटा जा रहा है और यहां सत्ताधारी दल के नेता अवैध उत्खनन में लिप्त रहे हैं।




