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फरसे से हमले के आरोपी को पकड़ा, रात में छोड़ा तो भड़का पीड़ित परिवार; पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल / Shivpuri News

शिवपुरी जिले के रन्नौद थाना क्षेत्र के अकाझिरी कस्बे में फरसे से हमले के मामले में पुलिस कार्रवाई को लेकर पीड़ित परिवार ने नाराजगी जताई है। परिवार का आरोप है कि 15 अगस्त को अकाझिरी निवासी छोटू ओझा पर फरसे से हमला करने के आरोपित हरकिशन उर्फ हर्रू कुशवाह को पुलिस ने मंगलवार को हिरासत में लिया, लेकिन रात में छोड़ दिया। आरोपी को हिरासत में लेने के बाद छोड़े जाने की जानकारी सामने आने पर पीड़ित पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं।

पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के बाद से ही आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है। परिवार ने आरोप लगाया कि घटना के बाद उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिल रही हैं, जिसके चलते परिजन भय के माहौल में हैं।

एक साल में दो लोगों पर फरसे से हमले का दावा

पीड़ित पक्ष ने दावा किया है कि पिछले एक वर्ष के दौरान क्षेत्र में दो लोगों पर फरसे से हमला किए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं को लेकर ग्रामीणों के बीच भी पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा और सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति पर गंभीर हमला करने के आरोप सामने आए हैं तो मामले की निष्पक्ष जांच कर पुलिस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आरोपी के खिलाफ कानून के तहत क्या कार्रवाई की गई है।

हिरासत में लेने के बाद छोड़ने का आधार क्या?

पीड़ित परिवार ने पुलिस से सवाल किया है कि यदि आरोपी को हिरासत में लिया गया था तो उसे रात में छोड़ने का आधार क्या था। परिवार का कहना है कि आरोपी को किन परिस्थितियों में छोड़ा गया और उसके खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई, इसकी जानकारी पुलिस को स्पष्ट करनी चाहिए।

परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच, पुलिस कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने और आरोप सही पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।

थाना प्रभारी से न्याय और सुरक्षा की गुहार

पीड़ित परिवार ने रन्नौद थाना प्रभारी राजीव दुबे सहित पुलिस अधिकारियों से मामले में स्पष्ट कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि धमकियों के चलते उन्हें सुरक्षा की चिंता है और वे पुलिस से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।

फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की ओर से आरोपी को हिरासत में लेने और बाद में छोड़े जाने को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ऐसे में पीड़ित परिवार की शिकायत और पुलिस की कार्रवाई के बीच की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।