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नोटिस में 7 अक्टूबर को बुलाया, अपना पक्ष रखने पहुंचे ग्रामीण तो तहसील पर लटका मिला ताला; शासकीय भूमि के नोटिस पर उठे सवाल / Shivpuri News

शिवपुरी। पिछोर अनुविभाग के ग्राम खाड़ोए मोतीपुर में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के नाम पर जारी नोटिस को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने नोटिस की प्रक्रिया और उसमें दर्ज सर्वे नंबर पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी और तथ्यहीन बताया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी रुचिका जुनेजा द्वारा कोटवार रोहित परिहार के माध्यम से उन्हें नोटिस थमाए गए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार नोटिस में सर्वे नंबर 827, रकबा 0.10 हेक्टेयर भूमि को चारागाह बताते हुए उस पर अतिक्रमण का उल्लेख किया गया है। वहीं ग्रामीणों का दावा है कि उक्त भूमि राजस्व रिकॉर्ड में मोतीलाल, रामप्रसाद, कमलसिंह सहित अन्य लोगों के नाम भूमि स्वामी के रूप में दर्ज है और संबंधित लोग लंबे समय से इस जमीन पर खेती कर रहे हैं।

7 अक्टूबर को बुलाया, लेकिन तहसील कार्यालय पर मिला ताला

नोटिस में संबंधित ग्रामीणों को 7 अक्टूबर को अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित तारीख पर ग्रामीण अपना पक्ष रखने खोड़ तहसील कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां कार्यालय पर ताला लटका मिला। ग्रामीणों का कहना है कि जब प्रशासन ने उन्हें बाकायदा नोटिस देकर तय तारीख पर बुलाया था, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की मौजूदगी भी होनी चाहिए थी।

तहसील कार्यालय पर ताला मिलने के बाद ग्रामीणों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया कि वे अपना पक्ष आखिर किस अधिकारी के सामने रखें और अगली कार्रवाई के लिए उन्हें कहां जाना होगा।

जमीन चारागाह है या निजी स्वामित्व की, जांच की मांग

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि संबंधित जमीन राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम दर्ज है और वे वर्षों से उस पर खेती कर रहे हैं, तो फिर उसे चारागाह भूमि बताते हुए अतिक्रमण का नोटिस किस आधार पर जारी किया गया, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने नोटिस की वैधता, सर्वे नंबर और राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग करते हुए प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया, लेकिन कार्यालय बंद मिलने से वे परेशान होकर वापस लौटने को मजबूर हुए।

अब पूरे मामले में तहसील प्रशासन का पक्ष सामने आने और राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है और ग्रामीणों को जारी नोटिस किस आधार पर दिए गए।